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NHRC ने 19 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों से सर्दियों में बेघर और कमजोर लोगों को शीत लहरों से बचाने के उपाय करने का आग्रह किया

• आयोग ने 2019 और 2023 के बीच ठंड से 3,639 मौतों के एनसीआरबी डेटा का हवाला दिया
• आश्रय और संसाधनों की कमी के कारण बुजुर्गों, बच्चों और बेघरों सहित कमजोर तबके के सामने आने वाले जोखिमों पर प्रकाश डाला गया
• शीत लहरों से निपटने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई और संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश में शीत लहर को देखते हुए, 19 राज्य सरकारों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों से आग्रह किया है कि वे आश्रय और संसाधनों की कमी के कारण जोखिम में रहने वाले संवेदनशील वर्गों, विशेष रूप से नवजात शिशुओं, बच्चों, गरीबों, बुजुर्गों, बेघरों, निराश्रितों और भिखारियों की सुरक्षा के लिए पूर्व-निवारक कदम उठाएं और राहत उपाय लागू करें। आयोग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते मौसम में मानवाधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आयोग ने कड़ाके की ठंड से प्रभावित संवेदनशील आबादी की रक्षा करने, उनकी गरिमा का सम्मान और उसे बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 'भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्याएं' शीर्षक वाली रिपोर्ट का हवाला देते हुए, आयोग ने 2019 और 2023 के बीच शीत लहरों के कारण कुल 3,639 लोगों की मौत होने की सूचना दी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे अपने पत्र में, आयोग ने शीत लहरों के असर को कम करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशानिर्देशों को दोहराया है, जिनमें शामिल हैं:
• उपचार प्रोटोकॉल स्थापित करना;
• दिन और रात के आश्रय स्थल स्थापित करना;
• सर्दी से संबंधित बीमारियों के लिए चिकित्सा देखभाल प्रदान करना और मानक उपचार प्रक्रियाओं को लागू करना; और
• राहत प्रयासों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करना तथा उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का आग्रह किया है तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शीत लहर के प्रतिकूल प्रभावों से संवेदनशील आबादी की रक्षा के लिए अपनाए गए उपायों पर अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
source:PIB

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