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"गर्दभ महाराज" का भव्य संगीतमय मंचन।

"गर्दभ महाराज" का भव्य संगीतमय मंचन।
*लखनऊ|* लखनऊ। शहर की ख्यातिलब्ध सांस्कृतिक संस्था भूषण सेवा संस्थान ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, भातखंडे, कैसरबाग में अपनी नवीनतम संगीतमय हास्य प्रस्तुति *" गर्दभ महाराज"* का मंचन बड़े ही धूमधाम से किया। इस प्रस्तुति का परिकल्पना, लेखन, संगीत व निर्देशन वरिष्ठ रंग व नौटंकी निर्देशक अमित दीक्षित "राम जी" ने बड़ी ही सुंदरता से किया, उन्होंने 40 कलाकारों के साथ इस प्रस्तुति के माध्यम से एक तरफ दर्शकों को गुदगुदाया तो दूसरी तरफ उन्हें सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
हंसी-खुशी का सफर हंसते गाते कट तो जाता है, परंतु उसमें विचार, संवेदना और अनुभव का मिश्रण अति आवश्यक है क्योंकि उस कृति को सार्थकता तभी मिलती है। किसी कृति का उद्देश्य मात्र दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करना ही नहीं अपितु उसमें समाज के हितार्थ प्रेरणा और उद्देश्य परक संदेश देना भी होना चाहिए। अपनी भारतीय सभ्यता, संस्कृति व परंपरा का भी परिचय अति आवश्यक है। संवेदना शून्य हो रहे समाज के मध्य हमें ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करने होंगे ताकि युवा पीढी विरासत में प्राप्त संस्कारों की दौलत का महत्व समझ सके। परिवार के मालिक बनकर आप घर में शासन तो कर सकते हैं पर दिलों में शासन करने के लिए हमें परिवार का माली बनना होगा। इस नाट्य कृति के पूर्वाभ्यास के दौरान हमें बहुत बार लगा कि कितनी ऊर्जा है इन नए युवा कलाकार साथियों में पर उन्हें एकाग्रचित्त होकर इस ऊर्जा को संचित करना होगा। यदि उन्हें अच्छे अवसर मिलते रहेंगे तो ये आकाश की बुलंदियां छूने का दम रखते हैं बस उन्हें दिशा विहीन होने से रोककर सच्ची राह चाहिए। फिल्म, सीरियल की चकाचौंध बुरी नहीं पर रंगमंच में अभिनय की सच्ची लगन वफादारी से हर ऊंचा मुकाम पाया जा सकता है क्योंकि यदि रंगमंच अभिनय की नर्सरी है तो परास्नातक भी यही है। अथाह समुद्र है यह रंगमंच, जितना बढ़ते जाइए, गहराई उतनी ही बढ़ती जाती है। इन लहरों में आप डूब न जाएं इसके लिए शर्त यह है कि उस गहराई में हमें संयम, लगन, सूझबूझ व ईमानदारी से काम लेना होगा तभी हम सागर की
उत्ताल लहरों के पार जा सकेंगे, अन्यथा..
"सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता वरना विफलता भी शॉर्टकट होगी"
प्रस्तुति में रंगमंच के प्रतिमान स्थापित करने का सामर्थ्य हो या न हो पर यह ईमानदारी का प्रयास है आप सबका दिल से ही आशीर्वाद भी चाहिए।
इस संगीतमय नाट्य प्रस्तुति में कल्लू नामक कुम्हार अपनी पत्नी गंगी के साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है। कुछ ऐसा घटना क्रम घटता है कि देवताओं के गुरु वृहस्पति का धरती पर आगमन होता है और कल्लू कुम्हार उनके साथ ही स्वर्ग चल जाता है। स्वर्ग में वो अपनी हास्यास्पद हरकतों से सबको अचंभित कर देता है।
नाट्य प्रस्तुति में यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि मानवता ही सबसे बड़ी है। इस भव्य नौटंकी प्रस्तुति की *परिकल्पना, लेखन, संगीत व निर्देशन अमित दीक्षित 'रामजी'* द्वारा बड़े ही भावपूर्ण व सधे ढंग से किया गया है। उन्होंने इस नौटंकी प्रस्तुति को प्रयोगात्मक व संगीतमय ढ़ंग से एक अलग रूप में प्रस्तुत किया है। 40 कलाकारों की भव्य संगीतमय प्रस्तुति एक अनूठी मिसाल कायम करेगी, इस प्रस्तुति में कल्लू की भूमिका में अमित सिंह , गंगी की भूमिका में ज्योति, शिखा, राजा की भूमिका में शिवम पाल, दीवान की भूमिका में शुभ्रेश, राजकुमारी की भूमिका में अंशिका, बृहस्पति की भुमिका में पंकज, इन्द्र नैतिक, जॉन उद्भव, जॉनी अभिषेक दुबे, जनार्दन सत्यांश, चन्द्रदेव शिवदिन, शनिदेव उन्नत बहादुर, अग्निदेव उज्जवल, आकाश सुरेश, रम्भा कशिश, चित्रसेन नट आयुष, नटी लता, अर्चिता, मौसी कीर्तिका, गोपियां शिखा, वैष्णवी, रिनी, लावण्या, अघम्या चित्रसेन सत्यांश थे। गायन मण्डली मे अर्चिता श्रीवास्तव, कीर्ति चौरसिया, दिविज दीक्षित, शुभ्रेष, मोहित, उद्भव, अभिषेक, शिवम थे। इस प्रस्तुति में नृत्य संरचना प्रिया चंद, आस्था मिश्रा व नृत्य आरोही, निधी ने निभाई। मंच परे ऑर्गन अरविंद वर्मा, नक्कारा मो० सिद्दीक़, तबला मो. इलियास, ढोलक मुन्ना खान व वस्त्र विन्यास लता बाजपेई, कीर्तिका श्रीवास्तव, मंच प्रबंधन शुभ्रेश शर्मा, मुख सज्जा राकेश सैनी, मंच सज्जा आशुतोष विश्वकर्मा ने किया व परिकल्पना, लेखन, संगीत व निर्देशन अमित दीक्षित 'राम जी' द्वारा किया गया।

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