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शांति नोबल पुरस्कार और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प

वेनेजुएला जो दक्षिण अमेरिका मे स्थित एक छोटा सा देश है जिसकी आबादी 3.5 करोड की होगी।यहाँ
वर्तमान में तानाशाही शासन व्यवस्था है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के लिए खतरा बनी हुई है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व में वेनेजुएला की सरकार पर तानाशाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो समेत कई नेताओं को प्रताड़ित किया गया है और उन्हें राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के प्रयास किए गए हैं।

वेनेजुएला में लोकतंत्र को बहाल करने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए मारिया कोरिना मचाडो समेत कई विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने संघर्ष किया है। मारिया कोरिना मचाडो को उनके इसी संघर्ष के लिए 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है।

वेनेजुएला की स्थिति पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जाती रही है, और कई देशों और संगठनों ने वहां के मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने वैश्विक स्तर पर शांति के प्रयास करते हुए मध्यस्थता कर काफी युद्ध रुकवाए है और रूस यूक्रेन युद्ध को भी रुकवाने के प्रयास किए जा रहे है।ऐसी स्थिति मे नार्वे देश की नोवल पुरस्कार समिति द्वारा वेनेजुएला की विपक्षी महिला नेता मारिया को इस वर्ष 2025 का नोवल पुरस्कार विवादित हो गया है।यद्यपि इससे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा को
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान नोवल शांति पुरस्कार दिया गया है।ट्रम्प का मानना है कि उनका कार्य इन अमेरिकी राष्ट्रपति से ज्यादा महत्वपूर्ण है।नार्वे समिति ने लगभग 350 लोगो मे से वेनेजुएला को चुना है।

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