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राज्य स्तरीय संयुक्त सर्वे शोध हेतु आकल्प एवं उपकरण निर्माण कार्यशाला का हुआ समापन।




राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर द्वारा अनुमोदित वार्षिक पंचांग सत्र 2025-26 के अंतर्गत प्रस्तावित अनुसंधान कार्यक्रमों की श्रृंखला में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा की पहुँच की वस्तुस्थिति एवं चुनौतियों का अध्ययन विषय पर राज्य स्तरीय सर्वे शोध हेतु आकल्प एवं उपकरण निर्माण कार्यशाला का आयोजन लीडर डाइट, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, मसूदा-अजमेर के तत्वावधान में किया गया।कार्यशाला 6 से 9 अक्टूबर तक ब्यावर स्थित राज दरबार मैरिज गार्डन में चार दिवसीय सघन शैक्षिक गतिविधियों के साथ संपन्न हुई। कार्यशाला में अजमेर के अतिरिक्त सहयोगी डाइट डूंगरपुर, बांसवाड़ा, टोंक एवं भरतपुर के शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राज्य स्तर पर डिजिटल शिक्षा की पहुँच, उसकी प्रभावशीलता, व्यवहारिक चुनौतियों एवं भविष्य की संभावनाओं का गहन अध्ययन करना था। समापन समारोह 9 अक्टूबर को प्रातः 11:00 बजे कार्यशाला के अंतिम दिन गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर डाइट मसूदा की प्राचार्य श्रीमती श्रुति खींची ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से शोधार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि शोध मात्र एक अकादमिक गतिविधि नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार का आधार है। डिजिटल शिक्षा का प्रभाव विद्यार्थियों के सीखने की गति, समझ, रचनात्मकता और सहभागिता पर किस प्रकार पड़ रहा है, इसका व्यवस्थित अध्ययन आवश्यक है। इस दौरान उप प्राचार्य डॉ. गोरधन लाल मीणा ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की “डिजिटल शिक्षा आज समय की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार भी बन चुकी है। राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक और सामाजिक विविधता वाले राज्य में डिजिटल शिक्षा के प्रसार से दूरस्थ और वंचित वर्ग तक शिक्षा पहुँचाने में नई संभावनाएँ खुली हैं परंतु इसके साथ ही अनेक चुनौतियाँ भी हमारे सामने हैं। जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपकरणों की उपलब्धता, तकनीकी प्रशिक्षण की कमी तथा शैक्षिक सामग्री का स्थानीय संदर्भ में निर्माण। यह कार्यशाला शोधार्थियों को अवसर प्रदान करती है कि व समस्याओं की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करें और समाधानमूलक सुझाव तैयार होते है। आने वाले समय में यह अध्ययन न केवल विद्यालय स्तर पर बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में भी सहायक सिद्ध होगा। समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. विनोद टेकचंदानी ने कहा डिजिटल शिक्षा केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि शिक्षा के भविष्य की दिशा है। यदि हम चाहते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थी समान अवसरों का लाभ उठाएँ तो हमें डिजिटल शिक्षा की खाई (Digital Divide) को पाटना होगा। शोधार्थियों को चाहिए कि वह अपने उपकरणों और प्रश्नावलियों के माध्यम से ऐसी जानकारी संकलित करें। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि डिजिटल शिक्षा के प्रसार में कौन-सी बाधाएँ सबसे बड़ी हैं। सामाजिक, आर्थिक या तकनीकी। यह भी देखना होगा कि किस प्रकार प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से शिक्षक इस व्यवस्था को सहज बना सकते हैं। डॉ. राजेश डेटानी ने कहा कि शोध तभी सार्थक होता है, जब उसका प्रत्यक्ष प्रभाव शैक्षिक गुणवत्ता पर दिखाई दे। इस कार्यशाला के माध्यम से जो उपकरण निर्मित हुए हैं। वह आगामी सर्वेक्षण में न केवल आँकड़े एकत्रित करेंगे, बल्कि हमें शिक्षा की वास्तविक स्थिति का एक पारदर्शी चित्र भी देंगे।राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति, पहुँच और प्रभावशीलता को समझने के लिए यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण दस्तावेज सिद्ध होगा। विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर शोध आधारित निष्कर्ष आगे की योजनाओं को दिशा देंगे।कार्यशाला का संचालन एवं क्रियान्वयन डाइट मसूदा, अजमेर के IFIC प्रभाग के सन्दर्भ व्यक्ति डॉ. रमेश गुरु के तत्त्वावधान में किया गया। कार्यशाला में लीडर डाइट मसूदा अजमेर अन्य चार सहयोगी डाइट रहे। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, टोंक व भरतपुर के शोधार्थियों, प्राचार्य सुनीता चौधरी, डॉ. पूनम डागा, सान्वी, शिखा, शैफाली माहेश्वरी, कमल कांत, देवकीनंदन, सुमित, जय सिंह, डॉ. बलजीत, डॉ. थानेशवर, बद्री लाल, हिमांशु, कुलदीप, नीरज उपाध्याय, सूर्यकरण सोनी, सुमित शर्मा, डॉ. सुभाष जोशी, दिनेश प्रजापत, कुलदीप पंड्या, पंडित लोकेश जैन आदि शोधार्थी सम्मिलित हुए एवं कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा ने किया।आभार डॉ. सुभाष जोशी बांसवाड़ा ने किया।

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