logo

सरिसवा नदी: औषधीय धारा से नाले में तब्दील,

नमामि गंगे परियोजना पर उठ रहे सवाल
*******************
रक्सौल। नेपाल के हिमालय से निकलकर गंगा में मिल जाने वाली जीवनदायिनी सरिसवा नदी आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। कभी इस नदी का पानी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता था। कहा जाता है कि इसमें स्नान करने से असाध्य त्वचा रोग भी ठीक हो जाते थे। यही कारण था कि बाबा कृष्णदास ने नदी किनारे कुष्ठ रोगियों के लिए अस्पताल का निर्माण कराया था, जो आज भी रक्सौल के सुंदरपुर मोहल्ले में मौजूद है।

लेकिन समय के साथ लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ने सरिसवा नदी को नाले में बदल दिया। नेपाल के बीरगंज स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी सीधे इस नदी में बहाया जाता है। नतीजा यह है कि छठ पूजा जैसे आस्था के महापर्व पर भी श्रद्धालुओं को जहरीले पानी में खड़ा होकर सूर्य की उपासना करनी पड़ती है। हर साल लोग उम्मीद करते हैं कि बीरगंज प्रशासन गंदगी रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए यह मुद्दा कभी चुनावी एजेंडा नहीं बन सका। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, किसी ने भी नदी के संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी। वहीं, कुछ तथाकथित समाजसेवियों और संगठनों के लिए यह नदी अब "कामधेनु" साबित हो रही है। वे इसके नाम पर दुकानदारी तो चमका रहे हैं, लेकिन वास्तविक सुधार कहीं नजर नहीं आता।

हाल ही में स्थानीय संस्थाओं ने दावा किया था कि अरबों रुपये की लागत से ईटीपी (Effluent Treatment Plant) लगाया जाएगा और नदी को साफ किया जाएगा। लेकिन आज भी रक्सौल के लोग उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जनता का कहना है कि वादे बहुत हुए, अब काम धरातल पर दिखना चाहिए।

👉 सवाल यही है कि क्या सरिसवा नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट पाएगी, या नमामि गंगे जैसी परियोजनाएं कागजों तक ही सिमटकर रह जाएंगी?

#NarendraModi #PMOIndia #BiharSarkar #raxaulborder #Dmmotihari

74
5854 views