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भटौली गौशाला में चारे की कमी से गायों की हो रही दर्दनाक मौतें: प्रबंधकों पर लापरवाही का आरोप, सरकारी अनुदान का दुरुपयोग?

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के भटौली गांव स्थित गौशाला में चारे और पानी की भयानक कमी के कारण गायें तड़प-तड़प कर मर रही हैं। इस महीने में ही कम से कम 15 गायों की मौत हो चुकी है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। गौशाला प्रबंधकों पर सरकारी अनुदान के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है, जबकि गौसंरक्षण का दावा करने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ग्रामीणों ने एक वायरल तस्वीर साझा की, जिसमें गौशाला के खंडहरनुमा ढांचे में कमजोर और बीमार गायें सूखे भूसे पर पड़ी नजर आ रही हैं। तस्वीर में नीले ड्रमों में गंदा पानी और चारों ओर बिखरी गंदगी साफ दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना 2-3 गायें भूख-प्यास से दम तोड़ रही हैं, और प्रबंधक “गौहत्या” के दोषी बनते जा रहे हैं।

गौशाला की बदहाली: चारा नहीं, सिर्फ मौत का साया
भटौली गौशाला, जो सैकड़ों परित्यक्त गायों का आश्रय है, सरकारी अनुदान पर निर्भर है। प्रति गाय प्रतिदिन 30-40 रुपये का फंड मिलने के बावजूद, यहां हरा चारा, दवाई और साफ पानी की भारी कमी है। एक स्थानीय ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “प्रबंधक अनुदान का पैसा कहीं और उड़ा रहे हैं। गायें सूख रही हैं, और लाशें सड़ रही हैं। यह गौसेवा नहीं, अपराध है।” तस्वीर में दिख रही गायें कुपोषित और बीमार लग रही हैं, जिनमें से कुछ मरी हुई प्रतीत होती हैं। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि “काउ बेल्ट” राज्यों में
गौशालाओं का सिस्टम ही जर्जर हो चुका है।

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