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सम्मान का वास्तविक मूल्य समझें पगड़ी-माला के खेल से परे, समाज सेवा


नई दिल्ली। समाज सेवा के नाम पर चल रहे दिखावटी आयोजनों और परंपराओं पर सवाल उठाते हुए “समाज हित भाग-3” में एक संवेदनशील पहल सामने आई है। लेखक विजयपाल बड़गूजर का कहना है कि सम्मान तब सार्थक होता है जब वह वास्तव में पात्र व्यक्ति को मिले, अन्यथा वह मात्र औपचारिकता और दिखावा बनकर रह जाता है। उन्होंने ज्वालापुरी-5 में पीपल के पेड़ के नीचे संत दुर्बलनाथ महाराज का स्मृति-चिन्ह कचरे में पड़ा देखकर गहरी पीड़ा व्यक्त की। विजयपाल बड़गूजर ने इसे समाज के दोहरेपन का प्रतीक बताया, जहां एक ओर संत के नाम पर पगड़ी और मालाओं से स्वागत होता है, वहीं दूसरी ओर उनकी स्मृति का अनादर किया जाता है।
उन्होंने समाज की विभिन्न समितियों और संस्थाओं को आगाह किया कि सम्मान देने से पहले उचित प्रोटोकॉल और व्यक्ति की सामाजिक प्रोफ़ाइल पर ध्यान देना चाहिए। समाज सेवा केवल मंच पर पगड़ी पहनाने या स्मृति-चिन्ह देने से साबित नहीं होती, बल्कि वास्तविक योगदान से दिखती है। विजयपाल बड़गूजर ने यह भी स्पष्ट किया गया कि- केवल पगड़ी-साफा के लिए नई संस्थाएं बनाना समाज के लिए शुभ संकेत नहीं। कुछ समितियों में आयोजक ही स्वयं को सम्मानित कर लेते हैं। सामूहिक विवाह जैसी पवित्र परंपरा को भी कई जगह गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। *कुछ लोगो को सामूहिक विवाह का मतलब ही नहीं पता ऐसे लोग एक जोड़े को ही सामूहिक समझते हें !*
प्रोटोकॉल की जानकारी के बिना किसी भी समिति का संचालन संभव नहीं।
*संस्था/समिति का स्टेज मंच कार्यक्रम प्रोटोकॉल से चलता किस का स्थान कहा होता हें उसी के हिसाब से स्थान दिया जाता हें ! राज्य स्थर और राष्ट्रीय स्थर की संस्था मै अंतर का ज्ञान होना चाहिए*
*जिस व्यक्ति को संस्था सविधान प्रोटोकॉल का ज्ञान नहीं ऐसे लोग प्रधान बनेगे संस्था/समितियों का संचालन करेंगे तो स्मृति चिंन्हो का यही हाल होगा!*
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “जो व्यक्ति अपने परिवार को नहीं संभाल सकता, वह समाज सेवा का दावा कैसे कर सकता है?” उनका मानना है कि असली समाज सेवा परिवार को संगठित और शिक्षित करने से शुरू होती है। यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज भी स्वतः सशक्त होगा। विजयपाल बड़गूजर ने स्पष्ट किया कि इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर कटाक्ष करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और वास्तविक सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।

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