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गोल्ड का बढ़ता जलवा: अंतरराष्ट्रीय रिज़र्व में नया रिकॉर्ड

AABHUSHAN WORLD NEWS & WORLD GOLD COUNCIL के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय बैंकों ने 1996 के बाद पहली बार अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड्स की तुलना में अधिक गोल्ड होल्डिंग्स इकट्ठा कर ली हैं। यह कदम दर्शाता है कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गोल्ड को एक बार फिर “विश्वास का ठोस स्तंभ” माना जाने लगा है।

यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2024 में गोल्ड ने यूरो को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रिज़र्व का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा हासिल किया। इस समय डॉलर 46% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, जबकि गोल्ड 20% और यूरो 16% हिस्सेदारी पर खड़ा है। इसका मतलब है कि अब केंद्रीय बैंक गोल्ड को न केवल निवेश, बल्कि सुरक्षा और स्थिरता का गारंटर मानने लगे हैं।

2024 में ही केंद्रीय बैंकों ने 1,000 टन से अधिक गोल्ड खरीदा—जो पिछले दशक के औसत से दोगुना है। विश्लेषकों के अनुसार, इस बढ़ती मांग के पीछे मुद्रास्फीति से बचाव, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने जैसे कारण हैं। यही वजह है कि गोल्ड की कीमतें इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं और अनुमान है कि यह आने वाले समय में $3,600–$4,000 प्रति आउंस तक जा सकती हैं।

Aabhushan World का स्पष्ट मानना है कि आने वाले वर्षों में गोल्ड वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का और भी अहम हिस्सा बनने जा रहा है। निवेशकों और पॉलिसी मेकर्स के लिए यह संकेत है कि पारंपरिक मुद्रा और बॉन्ड्स की तुलना में गोल्ड को दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बनाना अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

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