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सेमीकंडक्टर क्रांति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण


21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में जो देश तकनीकी रूप से अग्रणी हैं, वही सामरिक, औद्योगिक और आर्थिक शक्ति के केंद्र में हैं। इस तकनीकी वर्चस्व का आधार है, सेमीकंडक्टर जिसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का “मस्तिष्क” भी कहा जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, सैटेलाइट, रक्षा उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन और एविएशन तक, सभी क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर की भूमिका अत्यंत निर्णायक है। इसलिए सेमीकंडक्टर को तकनीकी आत्मनिर्भरता की बुनियाद कहा जाता है।

Integrated Circuit
Semiconductor IC
भारत, जो अब तक इस क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर रहा है, अब आत्मनिर्भर भारत के तहत अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। सरकार देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का वैश्विक हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी संदर्भ में 12 अगस्त 25 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी की बैठक हुई जिसमें ओडिशा, पंजाब और आन्ध्रप्रदेश में 4,600 करोड़ रुपये के निवेश से सिकसेम, सीडीआइएल ( कंटिनेंटल डिवाइस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, थ्री-डी ग्लास साल्यूशन और एडवांस सिस्टम इन पैकेज टेक्नोलॉजी की चार नई परियोजनाओं की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई। सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी छह परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है। इस प्रकार भारत में सेमीकंडक्टर क्रांति के तहत देश के छह राज्यों में दस परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिन पर 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

आखिर ये सेमीकंडक्टर क्या है? जो इतना महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर एक ऐसा पदार्थ है जिसकी चालकता, चालक (जैसे चांदी, तांबा आदि धातु) और अचालक (जैसे रबर) के बीच होती है। सामान्यतः सिलिकॉन, जर्मेनियम शुद्ध सेमीकंडक्टर है, जिनमें तीन संयोजकता वाले और पांच संयोजकता वाले पदार्थ मिला कर पी टाइप सेमीकंडक्टर और एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाएं जातें हैं। सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs), माइक्रोचिप्स, ट्रांजिस्टर और डायोड जैसे घटकों का मूल आधार होते हैं। सेमीकंडक्टर का उपयोग आज लगभग हर आधुनिक उपकरण में होता है जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित होम ऑटोमेशन, रक्षा प्रणालियां, अंतरिक्ष अन्वेषण, स्मार्ट सिटी, 5G नेटवर्क, और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक आदि क्षेत्रों में होता है। इसलिए आज सेमीकंडक्टर केवल एक औद्योगिक उत्पाद नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संसाधन बन चुका है।

कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर चिप संकट ने यह साफ कर दिया कि आधुनिक दुनिया सेमीकंडक्टर पर कितनी अधिक निर्भर है, उस समय ऑटोमोबाइल कंपनियों से लेकर स्मार्टफोन निर्माता तक, सभी को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी थी।

2023 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर का बाजार 600 अरब डॉलर से अधिक का हो चुका था, और अनुमान है कि 2030 तक सेमीकंडक्टर का बाजार एक ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगा। इस मांग को पूरा करने के लिए नए विनिर्माण केंद्रों की आवश्यकता पड़ेगी, भारत इस अवसर को भुनाने के लिए तत्पर है। वैसे तो भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन उद्योग पहले से मौजूद है। भारत विश्व को लगभग 20% चिप डिज़ाइन इंजीनियर उपलब्ध कराता है, जो अमेरिका की एएमडी, इंटेल जैसी कंपनियों में कार्यरत हैं। दुर्भाग्य से भारत में अब तक सेमीकंडक्टर का विनिर्माण और पैकेजिंग बड़े पैमाने पर नहीं हो सका है। भारत सरकार अब गम्भीरता से सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत कर रहीं है।डिजिटल इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की स्थापना इस दिशा में एक सार्थक कदम है। दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की। जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट की स्थापना को प्रोत्साहित करना और चिप डिजाइन और परीक्षण केंद्रों को बढ़ावा देना था। डी एल आइ स्कीम (डिजाइन लिंक्ड इंसेन्टिव) के तहत चिप डिज़ाइन स्टार्टअप्स और एमएसएमई को वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि भारत डिज़ाइन से लेकर निर्माण तक स्वदेशी रूप से सक्षम बन सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुम्बई में खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के 18वें अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा भारत में परम्परा और नवाचार का मेल है, भारत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की शक्ति में विश्वास करता है, इसलिए अनुसंधान के क्षेत्र में अरबों डालर का निवेश कर रहा है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत ने अमेरिका, जापान, ताइवान और यूरोपीय देशों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाया है। अमेरिका के साथ आइसीइटी के तहत सेमीकंडक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माइक्रोन की गुजरात में चिप पैकेजिंग यूनिट, फॉक्सकॉन, वेदांता, टावर सेमीकंडक्टर जैसी कंपनियों की भारत में निवेश कर रहीं हैं।

भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 300 बिलियन डालर तक पहुँचाया जाए। इसके लिए सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है।

आटोमोबाइल उद्योग को ही ले तो एक आधुनिक कार में लगभग 1000 से ज्यादा चिप्स लगतीं हैं। भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। चिप्स की स्वदेशी आपूर्ति से लागत में कमी और समयबद्ध उत्पादन सुनिश्चित होगा। ड्रोन, रडार सिस्टम, मिसाइल टेक्नोलॉजी, और एआइ आधारित युद्ध प्रणालियों में सेमीकंडक्टर एक अनिवार्य आवश्यकता है। रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी चिप उत्पादन भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम है। एआइ, डेटा सेंटर, और सुपरकंप्यूटिंग के लिए उच्च प्रदर्शन वाली चिप्स की जरूरत है। भारत का बढ़ता डिजिटल आधार और आइटी सेक्टर इसे वैश्विक तकनीकी की शक्ति बना सकता है। शिक्षा, अनुसंधान और मानव संसाधन विकास की दिशा में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन अत्यंत आवश्यक है। आइआइटी, एनआइटी, आदि में विशेष कोर्सेज और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। सेमीकोन इंडिया, फ्यूचर स्किल्सजैसे कार्यक्रमों से वीएलएसआइ डिजाइन, फैब प्रौद्योगिकी, सामग्री विज्ञान आदि में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

भारत यदि सेमीकंडक्टर का हब बनता है और अगले दशक में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिज़ाइन में आत्मनिर्भर बन जाता है, तो इसके बहुआयामी प्रभाव होंगे। भारत चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया के विकल्प के रूप में उभरेगा। इससे वैश्विक निवेश आकर्षित होंगे और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। चिप्स पर विदेशी निर्भरता समाप्त होने से भारत की सामरिक स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। साइबर सुरक्षा, रक्षा उत्पादों और गोपनीय तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इस क्षेत्र में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। इनोवेशन और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। भारत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रंखला का विश्वसनीय और लोकतांत्रिक साझेदार बनकर ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।

भारत, जो अभी सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा जाता है, अब वैश्विक तकनीकी निर्माण केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। सेमीकंडक्टर तकनीकी यज्ञ की अग्नि है, यह राष्ट्र निर्माण की नई आधारशिला है। सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और युवा मिलकर यदि इस अवसर का सही उपयोग करें, तो आने वाला समय भारत के लिए “सेमीकंडक्टर क्रांति का स्वर्णयुग” हो सकता है।

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