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महिला कार्डियक सर्जन द्वारा पहली बार सफ़ल पर्सीवल वाल्व प्रत्यारोपण

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी महिला कार्डियक सर्जन द्वारा "पर्सिवल वाल्व प्रत्यारोपण" की शुभ सूचना है

हृदय रोगियों के लिए राहत भरी ख़बर है कि पर्सीवल वाल्व तकनीक अब संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान 'एसजीपीजीआई' में भी उपलब्ध है यह एक "सुचर रहित" और स्वविस्तारित बायो प्रोस्थेटिक वाल्व है जिसे हृदय में लगाने में टांकों की आवश्यकता नहीं होती इसके कारण ऑपरेशन का समय बेहद कम हो जाता है और मरीज़ को अधिक तेज़ी से रिकवरी प्राप्त होती है इस तकनीक का प्रयोग करते हुए एसजीपीजीआई के सीवीटीएस विभाग की प्रोफ़ेसर डॉक्टर वरुणा वर्मा ने 70 वर्षीय मरीज़ की 'एआर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी' 13 अगस्त 2025 को सफ़लतापूर्वक सम्पन्न की।
बिहार के चंपारण निवासी 70 वर्षीय मरीज़ को सांस फूलना और छाती में दर्द की शिकायत रहती थी सीटी स्कैन और अन्य जांचों में एओर्टिक वाल्व ख़राब पाया गया सामान्य तौर पर 60 वर्ष से कम आयु वाले मरीज़ को धातु का वाल्व लगाया जाता है जबकि 60 से ऊपर की आयु वाले मरीज़ में बायो प्रास्थेटिक वाल्व लगाया जाता है किसी ह्रदयरोगी में पर्सीवल वाल्व पहली बार प्रत्यारोपित किया गया जिसे लगाने में मात्र 5 मिनट का समय लगा जबकि सामान्य प्रक्रिया में इसमें आधा घंटा का समय लगता है
प्रोफ़ेसर डाक्टर वरुणा वर्मा ने बताया कि मरीज़ की हालत स्थिर है और उसे आईसीयू में रखा गया है
पर्सीवल वॉल्व तकनीक का प्रयोग यूरोप और अमेरिका में कई वर्षों से सफ़लतापूर्वक किया जा रहा है भारत में भी कुछ चुनिंदा हृदय संस्थानों में इसका प्रयोग शुरू हो चुका है एसजीपीजीआई में इस तकनीक का इस्तेमाल मरीजों के लिए बड़ा लाभकारी व हितकारी माना जा रहा है बताते चलें कि दुनिया भर में महिला कार्डियक सर्जनों की संख्या मात्र 8% है और भारत में यह आंकड़ा और भी कम मात्रा 2.6 प्रतिशत है एसजीपीजीआई की डॉक्टर वरुणा वर्मा इन्हीं कुछ चुनिंदा महिला कार्डियक सर्जनों में शामिल हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश में पहली बार पर्सीवल तकनीक से सफ़ल सर्जरी कर एक इतिहास रच दिया है प्रदेश में चहुं ओर से उनको बधाइयां प्रेषित की जा रही हैं ।

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