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जमीन के विवाद में फंसे सुमित खरे, आर्थिक तंगी और धोखाधड़ी का शिकार

इंदौर शहर के निवासी सुमित खरे आज एक गहरे आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने जमीन खरीदने के दौरान कई धोखाधड़ी और जालसाजी का शिकार हुए हैं, जिसकी वजह से उन्हें भारी कर्ज और कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ रहा है।

सुमित खरे का कहना है कि उन्होंने साल 2017 से 2022 के बीच शिव चौहान को मदद के तोर पर कुछ उधार रकम दी थी । इस दौरान उन्होंने करीब 1,60,000 रुपये का खर्च किया, जो बाद में नहीं लौटाया गया। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो शिव चौहान के पास वह रकम नहीं थी। इसके बाद शिव चौहान ने उन्हें अपनी प्रॉपर्टी में मदद करने का प्रस्ताव दिया।

शिव चौहान ने कहा कि यदि सुमित उनके परिवार की एक जमीन का नाम अपने नाम पर चढ़ाने और उसकी बिक्री में मदद करें, तो वह उन्हें इस विवाद से मुक्त कर देंगे। इस मदद के बदले में सुमित ने भी कुछ और रकम दी, जिसमें पटवारी को भुगतान, अन्य खर्चे और अन्य दस्तावेजों के जरिए जमीन का नामकरण भी शामिल था।

मामला और जटिल तब हो गया जब यह सामने आया कि उस जमीन का असली मालिक शिव चौहान नहीं, बल्कि उनके परिवार वाले हैं। कुल मिलाकर, 8.5 बीघा जमीनी क्षेत्र में से 3.5 बीघा जमीन साफ-सुथरी शिव चौहान ओर उसके परिवार के नाम पर है, जबकि बाकी 5.5 बीघा जमीन 2011 में कुशाह परिवार के किशोर सिंह कुशाह ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम करा ली थी।

यह सब तब उजागर हुआ जब जमीन के असली मालिक की पहचान हुई और पता चला कि दस्तावेजों के आधार पर यह जमीन पूरी तरह से शिव चौहान के परिवार की होनी चाहिए थी।

सुमित खरे ने आरोप लगाया कि वह इस पूरे खेल में फंस गए हैं, और अब उनके पास कोई स्थिर आय स्रोत नहीं है ओर ना ही प्रशाशन कोई मदद कर रहा है। उन्होंने बैंक से ऋण लेकर जमीन के खरीद-फरोख्त के लिए पैसे जुटाए थे, जो अब 22 लाख रुपये के कर्ज में बदल चुका है। आज की तारीख में उनका जीवन आर्थिक तंगी और तनाव से गुजर रहा है, और उन्हें न्याय की उम्मीद है।

उनका कहना है कि वह सही कानूनी मदद और उचित न्याय चाहते हैं। उनके पास कोई आय का स्रोत नहीं है, और वह अपने कर्ज और धोखाधड़ी के कारण बहुत परेशान हैं।

वह प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

यह मामला जमीन की जालसाजी, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों का प्रतीक बन चुका है, और उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारी जल्द ही इस पूरे मामले की तह तक पहुंचकर सही फैसला लेंगे।

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