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चुनाव आयोग का तुगलकी फरमान नामंज़ूर!

जिस दस्तावेज़ को जनता ने सालों से संभाल कर रखा है, उसकी अब कोई अहमियत नहीं , और जो कागज़ आम लोगों के पास नहीं है, वही अब जरूरी बना दिया गया है। साफ़ है, चुनाव आयोग का इरादा जनता की सेवा नहीं, बल्कि अपने सनकी आकाओं को खुश करना है। कभी नोटबंदी, कभी वोटबंदी, जब से ये सरकार आई है, देश को उलझाने और जनता को परेशान करने का ही काम कर रही है।

अब ये नया षड्यंत्र बिहार की जनता को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है। बिहार में सरकार बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाया, तो अब लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है। लेकिन याद रखिए, बिहार की जनता चुप बैठने वाली नहीं है।

अगर यह तुगलकी फरमान लागू हो गया, तो बिहार की आधी से ज़्यादा आबादी का वोट देने का अधिकार छिन जाएगा। हम इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

9 जुलाई को सड़कों पर उतरने के लिए तैयार रहें।
यह लड़ाई हमारे अधिकारों की है, और बिहार की जनता इसे जीत कर ही दम लेगी।

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