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पीएम साहब कोरोना की रफ्तार और मरीजों की संख्या रोकनी है तो जनता का सहयोग लेने में देरी क्यों!

भले ही सरकारी अफसर कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हो लेकिन सही तो यह है कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप अभी तक तो कम होता नहीं नजर आ रहा है। बीमारी है बढ़नी शुरू हुई है तो रूकेगी भी लेकिन अगर इस इंतजार मेें बैठे रहे तो स्थिति और भी भयंकर हो सकती है इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारी रात दिन एक कर पीड़ितों को चिकित्सा सुविधाऐं उपलब्ध कराने में लगे है तो पुलिस वाले लाॅकडाउन के नियमों का पालन कराने के मामले में साम दाम दंड़ की नीति अपनाकर लोगों को मास्क लगाने दूरी बनाये रखने और हाथ धोने के लिए तैयार करने में लगे है। लेकिन जहां तक नजर जाती है स्वास्थ्य विभाग पीड़ित हो जाने पर नागरिकों को दवाई और ईलाज उपलब्ध करा हो वो एक अलग बात है लेकिन कोरोना महामारी के दौर में कहीं से भी ऐसी खबर पढ़ने देखने और सुनने को नहीं मिली कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इस मर्ज के विरूद्ध जागरूकता लाने के लिए कोई बड़ा प्रयास किया हो। हां कभी कभी जानकारी देने के नाम पर प्रेस सम्मेलन बुलाने की जेहमत भले ही उठा ली हो लेकिन इससे यह तो महामारी है छोटे मोटे मर्ज भी आसानी से इस व्यवस्था से ठीक नहीं हो पाते है।

जितना देखा और सुना और पहले दिन से ही इस परेशानी का थोड़ा बहुत ज्ञान होने के चलते अब तो यही लगता है कि सरकार चाहे केन्द्र की हो या प्रदेश की देश की राजधानी दिल्ली की हो या यूपी अथवा किसी भी दल की उसे इस कठिन दौर से आम आदमी को बाहर निकालने के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधि चाहे वो किसी भी दल के हो राजनीतिक दलों के शहर और जिलाध्यक्ष मीडिया और देश के गांव देहातों सहित शहर के गली मौहल्ला में बनी मौहल्ला समितियों और बस्तियों में क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सकों स्कूलों के संचालकों आदि की मदद हर स्तर पर लेनी चाहिए क्योंकि दवाई होने और टीका लगाये जाने के बाद भी आखिर कोरोना की बीमारी बढ़ती ही क्यों जा रही है इसकी सही जानकारी और रोकथाम के उपाय यही लोग दे सकते है अफसर कितने ही प्रयास कर लें उन्हें पता चल पाना मुश्किल है या संबंधित अधिकारी अथवा स्वास्थ्य विभाग के लोग निचले स्तर की जानकारी तक जाना नहीं चाहे।

माननीय प्रधानमंत्री जी और यूपी के मुख्यमंत्री जी कोरोना की रफ्तार को रोकना हो तो आम आदमी से जुड़े और गली मौहल्लों की जानकारी रखने वाले लोगों से विस्तार से संबंध तो साधना ही होगा। मुझे लगता है कि अगर ऐसा किया जाए तो जो ये मरीजों की संख्या और बीमारों की तादाद में बढ़ोत्तरी हो रही है उसे रोकने में आसानी हो यही एक सही तरीका है।

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