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“चाय पर चर्चा” के बहाने संवाद, सौहार्द और संवेदनाओं का संगम: देपालपुर में न्याय और पत्रकारिता के बीच ऐतिहासिक मुलाक़ात

संवाददाता अंकित भोला परमार देपालपुर
देपालपुर। कभी-कभी एक साधारण सी चीज़ जैसे एक कप चाय गहरे संवाद, रिश्तों की गरमी और सामाजिक जिम्मेदारियों की बातों की नींव बन जाती है। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर देपालपुर तहसील न्यायालय का दृश्य कुछ ऐसा ही था, जहाँ चाय की चुस्कियों के बीच न्याय और पत्रकारिता के दो मजबूत स्तंभ एक-दूसरे के और करीब आए। तहसील विधिक सेवा समिति, देपालपुर के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान के न्यायालय विश्राम कक्ष में यह आत्मीय आयोजन हुआ, जहाँ देपालपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने उनके साथ “चाय पर चर्चा” की। यह कोई औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि सौहार्द्र, आपसी समझ और सामाजिक कर्तव्यों की गरिमा को महसूस करने का क्षण था। इस अवसर पर न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान ने देपालपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री संदीप सेन को मध्य प्रदेश शासन की विशेष डायरी भेंट की, जो प्रशासनिक उत्तरदायित्व और स्मृतियों का प्रतीक है। वहीं प्रेस क्लब के सचिव श्री अब्दुल मतीन फारूकी को एक विलक्षण कलम भेंट कर लेखनी की शक्ति और पत्रकारिता की निष्ठा को सम्मानित किया गया। एक जिला न्यायाधीश द्वारा पत्रकार को कलम भेंट करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस मौन संदेश का प्रतीक था कि न्याय और पत्रकारिता, दोनों की ज़िम्मेदारी समाज के प्रति अपार है। कार्यक्रम में पत्रकारिता क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित चेहरे शामिल हुए अजय जैन, श्रीराम बारोड़, भारतसिंह तंवर, अजय भावसार, सोमिल मेहता, कृष्णा बाला जाधव, दिलीप यादव, मनोज अग्रवाल, निलेश चौहान, मोइनुद्दीन कुरैशी, दरबारसिंह ठाकुर, दीपक सेन, अंकित भोला परमार और अन्य अनेक पत्रकारों की उपस्थिति ने इस क्षण को ऐतिहासिक बना दिया। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि न्यायपालिका और मीडिया, दोनों ही लोकतंत्र के दो ऐसे स्तंभ हैं जिनके बीच मजबूत संवाद समाज को स्थिरता और न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जब संवाद चाय की चुस्की के साथ हो, तो वह सिर्फ औपचारिक वार्ता नहीं रहती वह एक सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय बंधन बन जाती है। देपालपुर में मनाया गया यह अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस किसी कार्यक्रम की औपचारिकता भर नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और कर्तव्यनिष्ठ सहयोग का उदाहरण था जो आने वाले वर्षों तक प्रेरणा देगा कि एक कप चाय भी बड़े बदलावों का कारण बन सकती है। यह कार्यक्रम देपालपुर के सामाजिक इतिहास में एक सौम्य, सशक्त और सराहनीय अध्याय बनकर दर्ज हो गया है।

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