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ग्राहक हित में बीमा कंपनियों पर और ज्यादा कसा जाए शिकंजा, उपभोक्ता अपने अधिकारों को जानें

जब से मुझे बीमा और इसके फायदों के बारे में पता चला और कुछ घटनाएं देखने को मिली तब से इसे करोन में जाने वाले पैसे में कोई बहुत बड़ा लाभ ना मिलने के बाद भी मेरा प्रयास रहता है कि परिवार के लोगों के अलावा अन्य भी कम से कम एक बीमा सामान्य और एक स्वास्थ्य का हर व्यक्ति को कराना चाहिए क्योंकि निर्धारित सीमा पूरी होने पर जमा पैसा मिल जाता है और उससे पहले अगर कोई घटना या दुर्घटना हो जाए तो निर्धारित राशि जो मिलती है उससे परिवार का पालन पोषण होने के साथ ही और भी कई काम जैसे बच्चों की पढ़ाई आदि आराम से हो जाता है। वर्तमान में कोरोना संक्रमण और उससे मरते लोगों या पीड़ितों की दशा को देखकर यह कहा जा सकता है कि दोनों ही तरह का बीमा कराना जीवन के लिए अत्यतंत आवश्यक है। शायद आम आदमी की यही भावना भांपकर बीमा कंपनी के संचालक सीधे या घुमा फिराकर स्वप्नलोक के समान कुछ विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार कर कई बार आम आदमी को अपनी लच्छे दार बातों में फंसाने में सफल हो जात है। जिसका बाद में उपभोक्ता को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
इरडा के निर्देश
शायद इसीलिए बीमा नियामक इरडा ने बीमा कंपनियों के भ्रामक विज्ञापन पर अंकुश लगाने की शुरुआत कर दी है। इरडा ने नया रेगुलेशन जारी किया है। जिसमें कहा है कि बीमा उत्पादों से जुड़े विज्ञापन स्पष्ट होने चाहिए.। इनसे संभावित ग्राहकों के मन में काल्पनिक सुरक्षा की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए। नियामक ने स्पष्ट कहा है कि ऐसा करने से असफल रहने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नए रेगुलेशन का लक्ष्य ग्राहक सुरक्षा के लिए पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
रेगुलेशन में इरडा ने कहा कि बीमा कंपनियों को सामग्री और डिजाइन का इस्तेमाल कर सूचना को कानूनी और पहुंच वाले तरीके से उपलब्ध कराना चाहिए। इसमें कहा है कि अनुचित और गुमराह करने वाले विज्ञापनों में वे विज्ञापन आएंगे जो स्पष्ट तौर पर किसी उत्पाद की पहचान बीमा के रूप में करने में विफल रहेंगे. इसके अलावा वे उत्पाद भी, जिनमें लाभ पाॅलिसी के प्रावधानों से मेल नहीं खाएंगे। इरडा ने कहा कि रेगुलेशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बीमा कंपनियां और बीमा मध्यवर्ती इकाइयां विज्ञापन जारी करते समय ईमानदार और पारदर्शी नीतियां अपनाएं और ऐसे व्यवहार से बचें जिनसे आम जनता के भरोसे को चोट पहुंचती हो।
उल्लेखनीय है कि इरडा ने पिछले साल भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (बीमा विज्ञापन एवं खुलासा) नियमन, 2020 का मसौदा जारी किया था। मसौदे पर हितधारकों से 10 नवंबर तक टिप्पणियां मांगी गई थीं।
शिकायत अधिकारी का नाम बताना होगा
नियामक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विज्ञापन के दावों के अनुरूप लाभ न मिलने पर उपभोक्ता की शिकायत सुनी जाएगी। इरडा ने यह भी कहा है कि कंपनियों को नियामक के पास विज्ञापन की शिकायत सुनने वाले प्रभारी के नाम पहले से दर्ज कराने होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं के लिए शिकायत करना और इरडा के लिए उसपर नजर रखकर कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।
लाभ की झूठी गारंटी देना पड़ेगा भारी
इस नियमन का एक और उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रचार सामग्री तार्किक, उचित और आसान भाषा में हो। लोग इनसे सही जानकारी प्राप्त करें और निर्णय कर सकें। इसमें कहा गया है कि अनुबंध की शर्तों का सही तरीके से खुलासा करने में विफल विज्ञापनों को भी भ्रामक माना जाएगा। बीमा कंपनी के मौजूदा प्रदर्शन के लिहाज से वास्तविकता से हटकर दावे करने वाले विज्ञापनों को भी भ्रामक की श्रेणी में रखा जाएगा।
खुलासा भी विज्ञापन की भाषा में
इरडा ने कहा कि आवश्यक खुलासा भी उसी भाषा में किया जाना चाहिए जिसमें पूरा विज्ञापन है। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद के नाम और लाभ में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जिससे उपभोक्ताओं में सुरक्षा की काल्पनिक भावना पैदा हो। यानी इन्हें किसी तरह से गुमराह करने वाला नहीं होना चाहिए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योंरेस के चीफ अंडरराइटिंग एवं क्लेम संजय दत्ता का कहना है कि इरडा का यह कदम बेहद सराहनीय है। दत्ता का कहना है कि बीमा विलासिता की नहीं बल्कि सबसे मुश्किल वक्त में काम आने वाला वित्तीय उत्पाद है। ऐसे में उपभोक्ताओं के भरोसे को किसी भी हाल में टूटना नहीं चाहिए। उनका कहना है इरडा की पहल से बीमा कारोबार में और पारदर्शिता बढ़ेगी जिसका लाभ उपभोक्ताओं को होगा।
नए उत्पादों लाने की छूट अवधि दो साल बढ़ाई
इरडा ने दो साल पहले बीमा कंपनियों को उपभोक्ता अनुभव के आधार पर नए उत्पादन लाने के लिए निर्देश दिए थे। इसे सैंडबाक्स आॅफ रेगुलेशंस कहते हैं यानी कार जितनी चलेगी उतना प्रीमियम जैसे नए प्रयोगों के आधार पर बीमा पाॅलिसी पेश की जाती है। यह परंपरागत पाॅलिसी से सस्ती होती है और खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है जिनकी जीवनशैली संयमित है। खराब तरीके से वाहन चलाने या चालान ज्यादा कटने की स्थिति में प्रीमियम महंगा होता है। जबकि सही से चलाने पर प्रीमियम सस्ता होता है।
मुनाफाखोर होते जा रहे हैं
पिछले वर्ष कोरोना की पीड़ा से त्रस्त आम उपभोक्ता से बीमा कंपनियों द्वारा अवैध रूप से कई वसूलियां की गई और बातों में फंसाकर जो छूट दिए जाने की घोषणा की गई थी वो नहीं दी गई। अब धीरे धीरे बीमा कंपनियों के अधिकारी भी उपभोक्ता की बात सुनने की बजाय एक मुनाफाखोर व्यापारी की भांति सोचने लगे हैं। जिससे नई नई बीमा कंपनियां नए नए लाभ की योजना लेकर मार्केट में आ रही है। और इसमें कोई बुराई भी नहीं है। वैसे तो इरडा ने तमाम तरह के प्रतिबंध निर्धारित किए ही हैं। लेकिन इसके साथ ही यह जरूर होना चाहिए कि बीमा के जो फार्म होते हैं वो हिंदी अंग्रेजी दोनों में हो।
अधिकारी का मोबाइल नंबर बता दें
बीमा एजेंट एक शपथ पत्र भरकर दे कि उसके द्वारा किस चीज का बीमा किया गया है और इसके साथ ही कंपनी के मुख्य अधिकारियों के पते और मोबाइल नंबर भी बीमा कराते समय उपलब्ध कराए जाएं जिससे परेशानी होने पर संपर्क किया जा सके। साथ ही अगर कोई एजेंट पाॅलिसी करते समय झूठ बोलने या बाद में सुविधा ना देने और दिलवाने का दोषी पाया जाने तो उसकी एजेंटशिप निरस्त की जाए और उसे जेल भेजा जाए। तथा पाॅलिसी दूसरी एजेंट के माध्यम से चालू रखने की भी सुविधा उपलब्ध हो। क्योंकि यह समयानुसार वक्त की सबसे बड़ी मांग कही जा सकती है। लेकिन उपभोक्ताओं को अपने अधिकार और फायदों के बारे में जागरूक होना पड़ेगा तभी वो बीमे के लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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