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खुली लूट के खिलाफ़ उठी आवाज़... लेकिन हुआ क्या?


प्रकाश विद्यालय में किताबों और स्टेशनरी की मनमानी बिक्री पर पत्रकारों की खोजी रिपोर्टिंग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
अभिभावकों की पीड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी की चेतावनी, और स्कूल को दी गई दो दिन की मोहलत—सबकुछ सुर्खियों में रहा।

लेकिन अब सवाल जनता का है:
क्या किताबों की ये लूट रुकी?
क्या स्कूल ने अपना जवाब दिया?
क्या जांच में कोई ठोस कार्रवाई हुई?

जनता को जानने का हक है:
"इतनी बड़ी खबर बनी, बार-बार प्रमुखता से छपी, सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुई—लेकिन नतीजा क्या निकला?"

क्या ये भी उन खबरों की तरह है, जो बस शोर बनकर रह जाती हैं?
शिक्षा के नाम पर व्यापार कब तक चलेगा?

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