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*कोर्ट के आदेश के बावजूद मुकदमा दर्ज न करने पर कोर्ट सख्त* *थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण* *कार्यवाही के लिए पुलिस कमिश्नर को आदेश की प्रति भेजने का दिया आदेश*

⚡️वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कोर्ट ने बुधवार को इस समय सख्त रुख अपनाया, जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट के आदेश के 25 दिन बाद भी सारनाथ थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इतना ही नहीं इस मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगे जाने के बाद भी कोर्ट को कोई उत्तर नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए थाना प्रभारी सारनाथ को सीआरपीसी की धारा 349 के तहत नोटिस जारी कर 29 मार्च तक स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में थाना प्रभारी पर कार्यवाही के लिए आदेश के प्रति पुलिस कमिश्नर को भी भेजने का आदेश दिया है।

⚡️बतादें कि सारनाथ थाना क्षेत्र के बुद्धा सिटी फेज 1 कालोनी की रहने वाली पीड़िता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की कोर्ट में बीएनएनएस की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप था कि उसके पति ने कुछ साल पहले उसे छोड़ दिया था। जिसके बाद उसका परिचय ग्राम डोमनपुरा, मुहम्मदाबाद, गाजीपुर निवासी मोहम्मद यासीन, जो उप्र पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है, से हुआ। इस दौरान यासीन प्रार्थिनी को शादी का प्रलोभन देते हुए तथा दोनों बच्चों को स्वीकार करने का आश्वासन देते हुए प्रार्थिनी के इच्छा के विरूद्ध प्रार्थिनी के साथ कई बार दुष्कर्म किये। प्रार्थिनी द्वारा शादी हेतु कहने पर मोहम्मद यासीन 19 मार्च 2019 को नोटरी के समक्ष 10/- रूपये के स्टाम्प पेपर पर एक शपथपत्र शादी के बाबत लिखकर दिया गया। साथ ही प्रार्थिनी के इच्छा के विरूद्ध मोहम्मद यासीन ने कई बार बलात्कार किया तथा मोहम्मद यासीन व उसका पूरा परिवार साजिश के तहत प्रार्थिनी का धर्म परिवर्तन कराकर 07 मार्च 2019 को नया नाम से निर्वाचन कार्ड व आधार कार्ड बनवाया गया। इस दौरान यासीन के परिवार वाले धोखाधड़ी व जालसाजी करते हुए 20 नवंबर 2019 को मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार सारनाथ स्थित एक गेस्ट हाउस से शादी कराया गया। इस बीच मोहम्मद यासीन प्रार्थिनी को धोखा देकर करीब 50 लाख रूपये मकान खरीदने हेतु कई किश्तों में लिये ओर देखा देकर मोहम्मद यासीन मकान अपने नाम से ले लिये तथा प्रार्थिनी के नाम कार खरीदने हेतु पैसा लिये और प्रार्थिनी के पैसे से ही स्वीफ्ट कार भी अपने नाम से खरीद लिये। इस दौरान जब प्रार्थिनी द्वारा मकान व कार अपने नाम करने हेतु कहने पर मोहम्मद यासीन प्रार्थिनी को गालियां व जान से मारने की धमकियां तथा दोनों बच्चों का अपहरण कर हत्या कर देने की धमकियां देने लगा।
इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद भी पीड़िता के बार-बार थाने दौड़ने के बाद भी सारनाथ थाना प्रभारी मुकदमा दर्ज नहीं कर रहे थे। जिस पर पीड़िता ने अपने अधिवक्ता विनय त्रिपाठी के जरिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर सारनाथ थाने से प्रगति रिपोर्ट मंगाने की गुहार लगाई थी। लेकिन थाना प्रभारी सारनाथ ने न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही प्रगति रिपोर्ट ही कोर्ट में भेजी। जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
⚡️ “ब्रेकिंग न्यूज़” वाराणसी

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