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रक्सौल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ मनीष कुमार जिला लोक शिकायत निवारण के न्यायलय के आदेश के बाद भी नहीं कर रहे कोई कार्रवाई

Bihar Crime News Digital Desk/रक्सौल नगर परिषद द्वारा फर्जी आवास मामले में कार्रवाई करने से बच रहे हैं जिला लोक शिकायत निवारण मोतिहारी द्वारा 17 मार्च के आदेश के एक सप्ताह बीतने के बाद भी आवेदिका से राशि वसूली नहीं करना पदाधिकारी के ऊपर प्रश्नचिन्ह उठ रहा है की उक्त मामला में 12 अगस्त 2024 को लिखित आवेदन के बाद सूचना के अधिकार और अनुमंडल लोक शिकायत निवारण रक्सौल से जिला लोक शिकायत निवारण मोतिहारी तक मामले में सुनवाई हुआ,उक्त मामले का 7 माह से अधिकारी की अपेक्षा के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, आदेश के एक सप्ताह बीतने के बाद भी पदाधिकारी आवेदिका को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं,साथ ही इस मामले में दोषी कर्मी और तत्कालीन वार्ड पार्षद पर भी इनकी नरमी बहुत सारे सवालों के कटघरे में ला खड़ा करता है,अब देखना है की जिला लोक शिकायत निवारण के आदेश पर कोई कार्रवाई होती भी हैं,या इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा | ये मामला प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना से सम्बन्धित है,तत्कालीन वार्ड पार्षद 4 और नगर पारिषद के कर्मी के मिलीभगत से ज्योति देवी के पति विजय प्रसाद गुप्ता ने अपने जमीन जिसका खाता 133 खेसरा 11 रकवा तीन धुर की जमीन को अपनी सास की जमीन बता कर सास के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेकर सरकार और विभाग के साथ धोखाधड़ी किया गया,उक्त खुलासा नगर परिषद कार्यालय के पत्रांक 594 दिनांक12/12/2024 से खुलासा हुआ,इसका मतलब पदाधिकारी और कर्मी के बिना मिलीभगत के संभव नहीं है,जिस जमीन का जिक्र नगर परिषद कार्यालय ने किया है,उक्त जमीन का खाता 133 खेसरा 11 रकवा 3 धुर ज्योति देवी के नाम से रजिस्ट्री है जिसका दस्तावेज न.4501है,और उक्त जमीन की खरीदारी दिनांक 22/11/2016 को हुआ है,और 2016 से प्रधानमंत्री आवास के आवेदन से पहले तक ज्योति देवी ने अपनी माँ को जमीन बिक्री नहीं की है तो किस नियम के तहत नगर परिषद ने ज्योति देवी के बदले सरस्वती देवी को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया | वो भी कागजात बिना जांच किए और न ही स्थलीय जांच के सरस्वती देवी के बैंक खाता में अलग अलग राशि प्रथम किश्त पचास हजार,सेकंड किश्त एक लाख,तीसरा किश्त बीस हजार,और चौथा किश्त तीस हजार जो12 जनवरी 2024 को किया गया उक्त मामले में इतनी बड़ी लापरवाही किसी पदाधिकारी और कर्मचारी भूलवश में नहीं हो सकता है ये सोची समझी साजिश है और इसमे सभी की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता | या उक्त राशि का बंदरबांट हुआ है,यही वजह होगी की आजतक राशि की वसूली से बचते आ रहे हैं,कभी न्यायालय को गुमराह कर तो कभी पैतृक विभाग से मार्गदर्शन के बहाने |

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