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ऑल इंडिया मीडिया असोसिएशन न्यूज नागपुर दंगा मामला: हाईकोर्ट की फटकार, घर गिराने की कार्रवाई पर उठे सवाल

ऑल इंडिया मीडिया असोसिएशन न्यूज नागपुर दंगा मामला: हाईकोर्ट की फटकार, घर गिराने की कार्रवाई पर उठे सवाल


नागपुर में 17 मार्च 2025 को हुई दंगों की घटना के बाद, नागपुर नगर निगम (NMC) ने प्रमुख आरोपियों फहीम खान और यूसुफ शेख के घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें गिरा दिया। यह कार्रवाई अनधिकृत निर्माण के नाम पर की गई। लेकिन अब मुंबई हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इस कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए पूछा:
"जिसका घर गिराया गया, क्या वह भारत का नागरिक नहीं था?"


क्या हुआ था?

✅ 17 मार्च: नागपुर में दो गुटों के बीच हिंसा भड़क उठी, जिसमें कई वाहन जलाए गए और तोड़फोड़ की गई।
✅ 18-23 मार्च: पुलिस ने 13 मामले दर्ज कर 114 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
✅ 24 मार्च: पुलिस सुरक्षा में नागपुर नगर निगम ने दंगा मामले के मुख्य आरोपी फहीम खान और यूसुफ शेख के घरों को ध्वस्त कर दिया।

फहीम खान – पूरा घर गिरा दिया गया।

यूसुफ शेख – एक कमरा और दो बालकनी तोड़ी गईं।

हाईकोर्ट की आपत्ति: प्रशासन पर तीखी टिप्पणी

मुंबई हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से जवाब मांगा:
❓ "बिना कोर्ट के आदेश के यह कार्रवाई क्यों की गई?"
❓ "अगर 3,000 अन्य अनधिकृत मकान हैं, तो सिर्फ इन्हीं घरों को क्यों निशाना बनाया गया?"
❓ "क्या प्रशासन केवल मुस्लिम आरोपियों को टारगेट कर रहा है?"

हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी नागरिक के साथ इस तरह की एकतरफा कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने नागपुर नगर निगम को तत्काल प्रभाव से ऐसी सभी अनधिकृत तोड़फोड़ पर रोक लगाने का आदेश दिया।


फहीम खान के परिवार का आरोप

फहीम खान के परिवार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
🔹 उनका दावा है कि घर पूरी तरह वैध था और सभी सरकारी मंजूरी के बाद बनाया गया था।
🔹 यह कार्रवाई शुद्ध रूप से प्रतिशोध (बदले की भावना) से की गई।
🔹 कोई कानूनी नोटिस या कोर्ट आदेश नहीं था, फिर भी घर तोड़ दिया गया।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विरोध

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रूप से भी माहौल गरमा दिया है:
🛑 विपक्ष के नेता:

सरकार पर एक विशेष समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगाया।

कहा कि "बुलडोजर पॉलिटिक्स" देश के कानून और संविधान के खिलाफ है।
🛑 भाजपा नेता:

सरकार का बचाव करते हुए कहा कि "दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।"

अनधिकृत मकानों को गिराने की प्रक्रिया जारी रहेगी।


🛑 मानवाधिकार संगठन:

इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया।

अब आगे क्या?

✅ हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार: कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
✅ राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना: विपक्ष इस मुद्दे को संसद और विधानसभा में उठा सकता है।
✅ प्रशासन का अगला कदम: क्या अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई होगी, या केवल एक समुदाय विशेष को ही निशाना बनाया जाएगा?

निष्कर्ष

इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासन, न्यायपालिका और राजनीति के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट के दखल के बाद यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।
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