
तुलसी गबार्ड की भारत यात्रा: अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का प्रमाण है। यह यात्रा केवल राजनयिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि खुफिया सहयोग, आतंकवाद निरोध, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रही। गबार्ड, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पली-बढ़ी हैं, इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को गहराई से समझती हैं। उनकी यह यात्रा अमेरिका की "इंडो-पैसिफिक रणनीति" के तहत भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में आतंकवाद, उभरते साइबर खतरों और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत और अमेरिका पहले से ही "डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव" (DTTI) के तहत रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत की सैन्य क्षमताओं को उन्नत करने में मदद मिल रही है। "बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट" (BECA) और "कम्युनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट" (COMCASA) जैसे समझौते दोनों देशों को रक्षा और खुफिया मामलों में और करीब ला रहे हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच गबार्ड की यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के "क्वाड" गठबंधन की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है। गबार्ड ने भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त करने के लिए संभावनाओं पर चर्चा की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका, चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को एक प्रमुख सहयोगी के रूप में देख रहा है।
तुलसी गबार्ड केवल एक राजनयिक ही नहीं, बल्कि एक ऐसी नेता हैं जिनकी भारत से सांस्कृतिक और व्यक्तिगत पहचान भी गहरी है। पहली हिंदू अमेरिकी सांसद के रूप में उन्होंने भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी, जिससे उनकी भारतीय जड़ों और आध्यात्मिक जुड़ाव का पता चलता है। यह यात्रा सिर्फ रणनीतिक नहीं थी, बल्कि भारत-अमेरिका के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नया आयाम देने वाली थी।
गबार्ड की यात्रा से यह स्पष्ट संकेत मिला कि अमेरिका और भारत आने वाले वर्षों में रक्षा, खुफिया साझेदारी और भू-राजनीतिक संतुलन में और अधिक घनिष्ठ सहयोग करेंगे। यह यात्रा अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी के एक नए और अधिक प्रभावशाली अध्याय की शुरुआत है, जिससे वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।