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मवाना में सपा की रैली : अतुल प्रधान और शाहिद मंजूर को छोड़ बाकी को नजरअंदाज क्यों कर गए अखिलेश

2022 के विधानसभा चुनाव के रंग में रंगी सपा की मवाना के नवजीवन इंटर काॅलेज में आयोजित रैली में मौजूद भीड़ को देखकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गदगद हो गए और पश्चिमी उत्तर में इतनी बड़ी जनसभा ने उनका रैली में मौजूदगी के दौरान पूरे समय प्रसन्न मूड बनाए रखा।

इस दौरान उन्होंने कहा कि अतुल प्रधान को सरधना से जीता दो और मुझे सीएम बना दो। अखिलेश बोले कि कहते हैं कि जो हस्तिनापुर से जीता उसी दल की सरकार प्रदेश में बनती है। मगर उन्होंने यहां से किसी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया इसका कारण तो वही जान सकते है।

रैली में प्रभुदयाल वाल्मिीकी, योगेश वर्मा, विपिन मनोठिया आदि मौजूद थे शायद इसलिए कि किसी एक का नाम लेने से कहीं माहौल में असंतोष की झलक ना दिखाई देने लगे इसलिए उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन कुछ लोगों का यह भी कहना था कि ऐसी सही सलाह उन्हें हिंडन से हेलिकाॅप्टर में साथ आए प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और दमदार जनाधार वाले राजनेता शाहिद मंजूर द्वारा दी गई थी। मुझे लगता है कि अगर ऐसा है तो वाकई में शाहिद मंजूर ने उन्हें सही मशविरा दिया लेकिन सभा के संयोजक दबंग छात्र और राजनेता अतुल प्रधान को जिताने की बात कहकर अखिलेश यहां यह स्पष्ट कर गए कि वो सरधना से ही चुनाव लड़ेंगे।

इस भारी जनसमूह की मौजूदगी में मंच पर अभी कुछ दिन पहले सपा में शामिल हुए योगेश वर्मा और महापौर सुनीता वर्मा भी अन्य नेताओं के साथ मौजूद थी। और इस मौके पर जब खासकर अपने इस जनपद की विधानसभा क्षेत्रों से इच्छुक और संभावित उम्मीदवारों का नाम लेकर उन्हें स्थापित किया जाना चाहिए था लेकिन अखिलेश यादव ने सिर्फ और सिर्फ अतुल प्रधान के अलावा किसी भी जनपद के नेता को ना तो बोलने का मौका ही दिया और ना ही उनका नाम लिया। हां स्वामी ओमवेश को बोलने का स्वर्णिम अवसर जरूर प्राप्त हो गया।
हर सभा में चाहे वह छोटे राजनीतिक दल की हो या बड़े उसमें मुख्य वक्ता जो भी होता है उसके द्वारा अपनी पार्टी के जिला और क्षेत्रीय अध्यक्ष तथा वर्तमान और पूर्व विधायकों के नाम ज्यादातर मौकों पर लिए जाते हैं। लेकिन यहां तो शहीद धनसिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण करने से पहले या बाद में अखिलेश यादव ने मौजूद रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव, विधायक रफीक अंसारी, पूर्व मंत्री जावेद आबदी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान, पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मिीकी, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, शहर अध्यक्ष आदिल चैधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह कैंट से पूर्व उम्मीदवार परमिंदर सिंह ईशु सहित जेपी नगर से आए निर्मोद यादव के अलावा रामकुमार राठी, किशोर वाल्मिकी की बात तो छोड़िए मंच पर मौजूद मेरठ की वर्तमान मेयर के नाम का उच्चारण नहीं किया। ऐसा क्यों किया यह तो वही जाने लेकिन यहां उन्हें नेताओं ने गदा भी भेंट की और भव्य मालाएं भी पहनाई लेकिन सभा के पूरे समय वो अपने नेता को आकर्षित नहीं कर पाए।

सभा में 50 हजार से ज्यादा की भीड़ और कई किमी तक रास्ते जाम से उत्साहित नेताओं और कार्यकर्ताओं का जोश और भी बढ़ सकता था अगर अखिलेश यादव जिस प्रकार से अपने सधे हुए शब्दों से भीड़ को साध गए उसी हिसाब से पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक श्री मुलायम सिंह की भांति कुछ नेताओं के नाम और पुकार देते तो सभी की स्थिति काफी खुशगवार हो सकती थी।
पूर्व सीएम ने वर्तमान मे सत्ताधारी दल भाजपा और उसकी सरकार पर सियासी तरकश से तीर छोड़ने और व्यंग्य करने का कोई मौका नहीं चूका। इसलिए लोगों का कहना था कि शाहिद मंजूर के साथ हेलिकाप्टर से यहां पहुंचे और यहां से अतुल प्रधान और योगेश वर्मा के साथ गए। अखिलेश यादव नेताओं का नाम लेना भूले नहीं शायद किसी नीति के तहत उनके द्वारा ऐसा किया गया।
2022 में मेरठ शहर से वर्तमान विधायक रफीक अंसारी और सरधना से 2017 में सपा उम्मीदवार रहे अतुल प्रधान तथा किठौर से जानकारों के अनुसार पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर का चुनाव लड़ना तो तय है। बाकी कौन कहां से लड़ेगा अभी कुछ भी तय नहीं है। लेकिन सभा में साईकिल के हेलमेट और हल और लगने वाले नारों ने चुनावी माहौल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पश्चिमी उप्र में सत्ता से बाहर होने के बावजूद अखिलेश की सभा में इतनी बड़ी भीड़ का जुटना यह दर्शाता है कि आने वाले चुनाव में परिणाम कुछ भी हो सकते हैं। और शहीद दिवस पर जो चुनावी बिगुल फूंका गया है उसके फायदे मतदान के दौरान सपा को मिलेगा या मतदाता पूर्व की भांति भाजपा की झोली में चला जाएगा यह समय के साथ तय होगा।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com


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