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कानून कोई गलत नहीं है, पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर हो अंकुश, दोषी पाए जाने पर समय से पूर्व दी जाए सेवानिवृति

राजद्रोह को लेकर बीते दिवस राज्यसभा में सदस्यों द्वारा पूछे गए सवालों के उत्तर में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेडडी द्वारा कहा गया कि राष्ट्रद्रोह के मामले राज्य दर्ज कराते हैं। केंद्र की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। इस संदर्भ में अब जल्दी ही एक समिति का गठन किया जा रहा है। उस पर आने वाले और समिति द्वारा दिए गए सुझाव पर विचार कर भविष्य में आगे कार्रवाई होगी।

फ्रीडम हाउस और वी-डेमेक्रेसी की हालिया रिपोर्ट्स में राजद्रोह कानून के कथित दुरुपयोग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मोदी सरकार द्वारा अब इस अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे कानून में संशोधन के संकेत दिए हैं। गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि सरकार ने आपराधिक कानून सुधारों के लिए एक समिति बनाई है और इसके लिए तमाम पक्षों से सुझाव मांग गए हैं।


गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बीते बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार ने राजद्रोह सहित आपराधिक कानून सुधारों के लिए एक समिति बनाई है और तमाम पक्षों से इस बारे में सुझाव मांगे गए हैं। गृह राज्य मंत्री रेड्डी राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि 2019 में राजद्रोह कानून (आईपीसी की धारा 124 ए) के तहत 96 गिरफ्तारियां की गई और दो व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया।


गृह राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के अलावा गैर सरकारी संगठनों और अन्य संगठनों से भी सुझाव मांगे गए हैं। सरकार सुझाव मिलने के बाद राजद्रोह कानून में संशोधन पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून नया नहीं बल्कि पुराना है और इससे पहले कांग्रेस शासन काल में 1948, 1950, 1951 और 1955 में संशोधन किया गया था।


यह सवाल किए जाने पर कि क्या सरकार राजद्रोह कानून में संशोधन पर विचार करेगी, उन्होंने कहा, हम एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की अध्यक्षता में आपराधिक कानून सुधार के लिए एक नई कमिटी बनाई गई है।
राजद्रोह के मामलों में दोषिसिद्धि की दर काफी कम होने को लेकर विपक्ष की आलोचना के बीच रेड्डी ने कहा कि ऐसे मामलों में केंद्र की कोई भूमिका नहीं होती और राज्य सरकारें मामले दर्ज कराती हैं। रेड्डी ने कहा कि इस बारे में केंद्र राज्यों को कोई निर्देश भी नहीं देता और भारत सरकार ने किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कोई गलत मामला नहीं दर्ज कराया है।


इस दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि 2019 में दो मामलों में ही दोषसिद्धि हुई। विपक्ष ने सवाल किया कि क्या सरकार फर्जी मुकदमे दर्ज करा रही है। रेड्डी ने कहा कि संसद से पारित होने के बाद संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन के दौरान कई टिप्पणियां की गईं लेकिन उन्हें पूर्ण आजादी दी गई। 100 से अधिक दिनों से चल रहे मौजूदा किसान आंदोलन के दौरान कई बयान दिए गए लेकिन सरकार ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
रेड्डी ने कहा कि जिन 96 मामलों का जिक्र किया गया है, उन सभी मामलों में अदालत का फैसला नहीं आ गया है। कई मामले अलग-अलग चरणों में हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामले जांच के चरण में हैं तो कुछ मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है वहीं कुछ में सुनवाई चल रही है।


कांग्रेस के समय राजद्रोह कानून के आंकड़े छिपाने का लगाया आरोप
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि इस सरकार ने आंकड़ों में राजद्रोह के मामले शामिल करने की कोशिश की है। कांग्रेस की सरकार में राजद्रोह कानून के आंकड़े छिपाए जाते थे। सरकार लोकतंत्र और प्रेस की आजादी के लिए प्रतिबद्ध है और कोई भी व्यक्ति संविधान के तहत बोल सकता है और सरकार इसमें कोई रुकावट नहीं पैदा करती।
फ्रीडम हाउस और वी-डेमोक्रेसी ने भी उठाए हैं सवाल
हाल में आईं दो इंटरनैशनल रिपोर्ट्स में भी भारत में राजद्रोह कानून का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए करने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी संस्था श्फ्रीडम हाउसश् ने अपनी रिपोर्ट में भारत का दर्जा घटाते हुए उसे आंशिक रूप से स्वतंत्र देशों की सूची में रखा है। इसी तरह स्वीडिश संस्था वी-डेमोक्रेसी ने अपनी डेमोक्रेसी रिपोर्ट में भारत को इलेक्टोरल आॅटोक्रेसी बताया है।
गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने पूरक सवालों के जवाब में जानकारी दी कि नागरिकता संशोधन कानून और किसान आंदोलन में सरकार ने कोई गलत मामला दर्ज नहीं कराया है और न ही राज्यों को कोई निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 2019 में देशद्रोह में 96 लोगों को गिरफ्तार किया गया और दो व्यक्ति करार दिए गए। 2015-19 में 25 लोग बरी किए गए। 2019 में असम में 23, जम्मू-कश्मीर में 16, कर्नाटक में 18, नगालैंड में 19, यूपी में 9, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में चार-चार, राजस्थान और तमिलनाडु में एक-एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। नगालैंड में दो लोग दोषी करार दिए गए जबकि झारखंड में 16, यूपी में एक और असम में 12 लोग बरी कर दिए गए।
मेरा मानना है कि राष्ट्रहित और समाज की भलाई के लिए कोई भी कानून और नियम सरकार बनाए उसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन उनकी आड़ में पुलिसवाले निरंकुश हो जाएं और बेकूसरों को ऐसे कानूनों का भय दिखाकर परेशान करे या उन्हें अपने डंडे के जोर पर इनमें फंसाए और गलत तरीके से कार्रवाई कर जेल भेजे वो व्यवस्था सही नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और देशद्रोह आदि के कानूनों पर विचार करने के लिए गठित समिति से मेरा अनुरोध है कि कुछ ऐसी व्यवस्थाएं नियमों में जरूर निर्धारित करे कि पुलिस की कार्य प्रणाली पर अंकुश लगा रहे और अगर किसी भी मामले में पुलिस कर्मियों द्वारा किसी को गलत फंसाने की कोशिश की गई हो या फंसाया गया हो तो संबंधित पुलिकर्मियों की संख्या कितनी भी हो और वह किसी भी पद पर हो उनके खिलाफ कार्रवाई हो और इतने यह चले उन्हें सस्पेंड करना चाहिए जिससे अगर कहीं गलत हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई हो सके। और अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो समयपूर्व उन्हें दी जाए सेवानिवृति।

 

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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