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समाज को एक नई दिशा ओर एकजुटता दिखाने का अवसर

आइए ! "एकजुटता दिखानें का अवसर ना छोड़े" महेश सैन

हर एक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाला एक नेता होता है, इंजन जिसमें पीछे डिब्बे जुड़कर रेल बनती है,लेकिन लम्बी रेल तभी तो बनेगी जब डिब्बे जुड़ना चाहेगें,जब सभी अपने आप को इंजन समझते रहेंगे तो पीछे लगने वाले डिब्बे कहा मिलेंगे,यही दशा आज सैन,सविता, महापद्मनंद,समाज की देखने को मिल रही है।

कर्नल किरोड़ी मल‌ बीसला,या महेंद्र सिंह टिकैत जैसे अलग अलग जातियों के नेता उभरें और अपने अपने समाज के लिए संघर्ष किया उनके लिए अनेकों साथियों ने अपना समर्थन दिया सहयोग दिया और काफी हद तक समाज को जरुरी सुविधाएं और उचित न्याय दिला पाने में, अपनी आवाज सरकार तक दमदार तरीके से उठा पाने में सफल भी रहें है। इस समाज ने तो किसी को अपना नेता मानने का आज तक मन ही नहीं बनाया। और यदि किसी पर आस्था जताई भी तो वह निजी स्वार्थ में फंसकर मलाई चाटकर अपने परिवार का हित करने में जुट गया और अपना उल्लू सीधा करके समाज से किनारा कर बैठा।

अख़बार और न्यूज़ चैनलों पर आप अक्सर देखते और पढ़ते हैं जहां सैन समाज पर होने वाले जघन्य अपराध और अत्याचारों की खबरें आएं दिनों देखने और सुनने को मिलती हैं, दबंगई के शिकार होते हुए सैन समाज को आप‌ सभी ने देखा है, किसी ने कुछ सहयोग करने का साहस ही नहीं उठाया,दस में से तीन ने यदि जोश और जज्बात में आगे बढ़ने की कोशिश भी की तो आर्थिक रूप से कमज़ोरी और एकजुटता के अभाव में सहयोगी साथ ना लग पाने के कारण स्वयं को जब अकेला पाया तो खुद को पीछे हट जाने की बेबसी झेलनी पड़ी, गांव और शहरों में अलग-अलग रिहाइशी इलाके में कम संख्या में दूर दूर सैन समाज के लोगों की बसापत होना और उसमें भी अधिकांश तय नक़ाब में रहना, टाइटल छिपा कर रखना, पहचान नहीं बताना जैसे मुद्दों के कारण परेशानियां और अकेलापन झेलना पड़ता है, यही कारण है कि इस समाज को अन्य समाज के सम्मुख छोटा, कमजोर और असहाय महसूस करना पड़ता है और यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी इसी हीन भावना के कारण स्वयं को समाज से अलग थलग रखती हैं या मिक्स, गोलमोल पहचान के साथ जीवन यापन करती है,ऐसी नौबत नहीं आए यदि समाज संगठित होकर रहें,एक दूसरे से मेल मिलाप बढ़ाए,एक दूसरे के लिए सदैव साथ खड़ा रहें। ऐसी ही सोच को सशक्त करने के लिए राष्ट्रीय सैन एकता के वार्षिकोत्सव समारोह में समस्त सैन समाज को आमंत्रित किया जा रहा है दो मार्च रविवार सुबह दस बजे श्री नारायणी धाम, बलदेवगढ़,जिला अलवर राजस्थान में, जहां विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी।

सैन समाज के सम्मानित राज्य सभा सदस्य, केंद्रीय राज्य मंत्री,विधायक,अर्जुन अवार्ड प्राप्त खिलाड़ी, सम्पादक, कवि, अधिवक्ता,पत्र कार,लेखक,पटवारी, ग्राम पंचायत प्रधान और अनेकों बोर्डों के अध्यक्ष पूर्व अध्यक्ष, पार्षद पूर्व पार्षद आदि महान पदों पर आसीन समाज की धरोहर को हार्दिक निमंत्रण भेजें गयें है, सैन समाज की सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्षों को भी आमंत्रित किया गया है,अब देखना यह है कि समाज को सीढ़ी बनाकर उपर चढ़ने वाले समाज एकजुटता के इस प्रयास में कितना बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। अपना काम करने वाले कामगार,केशकला कारीगर, किसान, नौकरी पेशा क्या एक आधे दिन की सामाजिक एकजुटता के लिए छुट्टी नहीं ले सकते, शामिल नहीं हो सकतें ? तो फिर क्यूं फिजूल में सामाजिक उत्थान, विकास, सेवा समिति, सुधार, कल्याण आदि आदि संगठन बना कर दिखावा करते हों, देशभर की सभी जातियों की राजनैतिक भागीदारी देखिए और अपने आप को देखिए, कोई दल तवज्जों नहीं देता,केवल इस्तेमाल किया और साईड कर दिया, क्यूंकि वह आपके बिखराव को जानता है,आप बंधीं बुहारी से बन जाएं, वरना एक एक सींक की तरह टूटते रहें हों और टूटते रहोगें। आईऐ एकजुटता दिखानें का अच्छा अवसर है, अपनी हाजरी दिखाएं और समाज उत्थान और राजनैतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के विषय पर ओजस्वी और प्रखर वक्ताओं के विचार सुनें।

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