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दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनने पर दें सहयोग : भाटी

 -अभिभावक परामर्श दात्री कार्यक्रम(द्वितीय चरण) का आयोजन संपन्न                 किशनगढ़(अजमेर)। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय किशनगढ़ के तत्वावधान में समावेशित शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत अभिभावक परामर्शदात्री कार्यक्रम (सीडब्ल्यूएसएन पेरेंट्स काउंसलिंग) के द्वितीय चरण का समापन ब्लॉक संदर्भ कक्ष, सीआरसी भवन हाउसिंग बोर्ड, किशनगढ़ पर हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीआरसी एवं प्रधानाचार्य राजकीय शार्दुल उच्च माध्यमिक विद्यालय किशनगढ़ श्रीमती फरीदा भाटी थी, जबकि अध्यक्षता कार्यवाहक संदर्भ कक्ष नियंत्रण अधिकारी एवं प्रधानाध्यापिका राजकीय माध्यमिक विद्यालय फरासिया श्रीमती अंजना चौधरी   ने की।

कार्यक्रम संयोजक चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड स्थित ब्लॉक संदर्भ कक्ष पर सत्र 2020- 21 के द्वितीय चरण की सीडब्ल्यूएसएन पेरेंट्स काउंसलिंग में दिव्यांग रोल मॉडल एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में दिव्यांग सहायक मंच किशनगढ़ के प्रदेशअध्यक्ष नरेंद्र कुमार शर्मा(अस्थि दोष) एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय काली डूंगरी के पूर्ण दृष्टिहीन अध्यापक हितेश कुमार ने भी विशेष तौर पर कार्यक्रम में भाग लिया और दिव्यांग होने के बावजूद भी उन्होंने एक सक्सेज व्यक्ति के रूप में समाज के भीतर कैसे मुकाम हासिल किया उससे जुड़े अपने जीवन कई संस्मरण सुनाए।

चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि किशनगढ़ ब्लॉक के राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालयों (कक्षा एक से कक्षा 12 तक) में अध्ययनरत दिव्यांग बालक बालिकाओं ने कार्यक्रम में उनके अभिभावकों के संग साझीदारी की।कुल 100 संभागीयों (जिनमें 50 अभिभावक व 50 दिव्यांग बालक बालिकाएं शामिल हैं ) ने काउंसलिंग में भाग लिया।  कार्यक्रम प्रभारी एवं संदर्भ व्यक्ति जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि कोविड-19 की पालना करते हुए ही बैठक में सेनीटाइजर व मास्क के उपयोग के बाद ही अभिभावकों व बच्चों को प्रवेश दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि फरीदा भाटी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों व व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ उनको हर तरह का सहयोग प्रदान करना प्रत्येक व्यक्ति का धर्म/ कर्तव्य होना चाहिए। ताकि दिव्यांगजन भी सफलता की ओर अग्रसर हो सकें, और आत्मनिर्भर बन कर अपना जीवन सही से जी सकें।

इसी प्रकार  अंजना चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दिव्यांगता कोई अभिशाप या पूर्व जन्मों का कर्म फल नहीं हैं, यह तो एक प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक अक्षमता है जिस पर समय रहते हुए पार पाया जा सकता है। एक और जहां रोल मॉडल के रूप में दृष्टिबाधित शिक्षक हितेश कुमार एवं दिव्यांग सहायक मंच के अध्यक्ष दिव्यांगजन नरेंद्र कुमार शर्मा ने दिव्यांगता के बावजूद भी अपने उपलब्धि पूर्ण जीवन में आई कठिनाइयों के बारे में बताया वहीं विभिन्न प्रकार की सरकारी सुविधाएं एवं सेवाओं के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी संभागीयों को प्रदान की।

काउंसलिंग में इस बार एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए दिव्यांग बच्चों व उनके अभिभावकों को बड़े स्मार्ट टीवी के जरिए देश की नामी-गिरामी सफलतम दिव्यांग शख्सियतों की कहानी व संस्मरण फिल्म व चलचित्र के माध्यम से सुनाई व दिखाई गई। जिसमें संभागीयों ने खासी रूचि ली।दक्ष प्रशिक्षक के रूप में चंद्रशेखर शर्मा व जगदीश प्रसाद शर्मा द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समावेशी शिक्षा कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों, योजनाओं व विभिन्न दिव्यांगताओं से जुड़े कानूनों की जानकारी प्रदान की गई।इस दौरान स्पीच व फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा भी दिव्यांग बच्चों को सम्बलन व उनके अभिभावकों को उचित परामर्श प्रदान किया गया। दृष्टिहीन अध्यापक हितेश कुमार ने एक महत्वपूर्ण बात अपने उद्बोधन में यह बताई कि असफलता के जरिए ही सफलता की सीढ़ी चढ़ी जा सकती है।

दिव्यांगजन नरेंद्र शर्मा ने दिव्यांग सहायता मंच से जुड़ने का आह्वान करते हुए दिव्यांग बच्चों व उनके अभिभावकों को दिव्यांगता से जुड़े कानूनों, केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त सहयोग व सुविधाओं सहित विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण गतिविधियों के बारे में भी अवगत कराया। इस अवसर पर विशेष शिक्षक सुश्री कंचन गोस्वामी(चक पिंगलोद) एवं सुश्री परिता कुमारी(राईकाबाग, रुपनगढ़) एवं विशेष शिक्षक नत्थू लाल योगी(खंडाच), राजेंद्र सिंह (मंडी टीबा, करकेडी) ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए और कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग प्रदान किया। स्थानीय विद्यालय के दिव्यांग अध्यापक संजय घीया(अस्थि दोष) ने रोल मॉडल के रूप में दिव्यांग बच्चों के माता-पिता एवं अभिभावकों की भरपूर हौंसला अफजाई की।

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