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हिमाचल मैं शिमला के सबसे बड़े गुड़िया हत्याकांड के दोषियों को कानूनी दंड

जैसा कि पूरे हिंदुस्तान को जानकारी है साल 2017 में हिमाचल में हुए बहुत बडे और घिनौने गुड़िया हत्याकांड को बड़ी ही राजनीतिक तरीके से मिट्टी डालने की कोशिश की गई थी जिस पर स्थानीय आम जनता ने अपनी जनशक्ति दिखाकर कानून को सही फैसला करने पर मजबूर कर दिया था। जनमानस चर्चाऐं ये भी थी कि इस हत्याकांड में आरोपियों को बचाने के लिए कई राजनीतिज्ञ व रसूखदार लोग शामिल थे जिसमें पैसों के बल पर कानून को खरीदने की कोशिश भी की गई थी जिस कारण आरोपियों को बचाने के षड्यंत्र में साथ देने बारे

निर्दोष विदेशी नागरिक सूरज नेपाली की सलाखों के अंदर की गई हत्या कर सबूत के साथ छेड़छाड़ करने एवं कानून के साथ खिलवाड़ करने
के जुर्म में शामिल आईजी जैसे पद पर बैठे हुए व कई बड़े-बड़े कानून के रखवालो को सलाखों के पीछे भेज दिया गया था और सीबीआई अदालत चंडीगढ़ को आज सही फैसला देने पर विवश कर दिया है उसकी घड़ी 27 जनवरी 2025 को सुनिश्चित हुई है जिस फैसले का इंतजार आज तक जनता को हो रहा है

इस फैसले ने बुरे काम का बुरा नतीजा क्यों भाई चाचा हां भतीजा वाली इस कहावत के बाबत बहुत बड़ी मिसाल समाज में पेश की है जहां तक बात आरोपियों की है वह अभी तक सस्पेंस के ठंडे बस्ते में बंद पड़ी हुई है जनता अफवाओं के अनुसार आरोपियों को बहुत ही साफ सुथरा तरीके से हिंदुस्तान से बाहर विदेशों में भेज दिया गया था ताकि कानूनी पकड़ उन पर ना पड़ सके अगर उन पर कानूनी पकड़ पड़ती तो बड़े-बड़े राजनीति से जुड़े लोगों के चेहरों से नकाब उतर जाता जिन्होंने इस गुड़िया हत्याकांड में आरोपियों को बचाने में साथ दिया था बाकी 27 जनवरी को फैसला आने पर ही सारा खुलासा होगा तब तक बने रहिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर

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