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श्रद्धांजलि: तबले के जादूगर जाकिर हुसैन के नाम

श्रद्धांजलि: तबले के जादूगर जाकिर हुसैन के नाम

थाप की वो गूंज अब खामोश हो गई,
सुरों की बगिया कहीं दूर खो गई।
संगीत के आकाश का वो सितारा,
छोड़ गया हमें रोशन एक सहारा।

तबले की थाप में जो जादू था उनका,
हर धड़कन से जुड़ा रिश्ता था उनका।
ऊंगलियों का नर्तन, रिदम की वो भाषा,
जाकिर थे वो, संगीत की परिभाषा।

संगीत में जैसे ईश्वर की बात थी,
हर सुर में उनकी अमिट छाप थी।
शब्दों से नहीं, तालों से बोलते थे,
दिल की धड़कनों को वो खोलते थे।

वो सांस्कृतिक सेतु, विश्व को जोड़ा,
हर कोने में उनका नाम चमका-झोड़ा।
तबला रो रहा है, सुर उदास हैं,
जाकिर के जाने से संगीत के पास हैं।

पर यादों में रहेंगे वो हर सदा,
संगीतमय जीवन था उनका अदा।
तालों में वो आज भी मुस्कराते हैं,
जैसे स्वर में सदा बसे जाते हैं।

श्रद्धा सुमन समर्पित हैं उनको,
जिनकी धुन ने संवार दी हर धुन को।
तबले का जादू कभी मरेगा नहीं,
जाकिर की विरासत कभी थमेगी नहीं।


विनम्र श्रद्धांजलि जाकिर हुसैन जी को।

कवि अंकित जैन
9479666123

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