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न्यूनतम वेतन मामले में सीटू को मिली बड़ी जीत हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्टे किया खारिज

मजदूरों को हक दिलाने के लिय श्रमिक संगठन सीटू सड़क से लेकर अदालत तक मजदूरों की लड़ाई लड़ रहा था लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में अब सीटू को सफलता हासिल हुई है इस संबंध में सीटू के महासचिव श्री प्रमोद प्रधान ने जानकारी देते हुए बताया की जद्दो जहद धरने और प्रदर्शन के बाद सरकार ने 10 वर्ष बाद वेतन पुनरीक्षण समिति की सिफारिश के आधार पर मध्य प्रदेश शासन ने 1 अप्रैल 2024 से न्यूनतम वेतन की घोषणा की थी जबकि यह वेतन नवंबर 2019 में होना था इसके बावजूद कारखाना मालिको के पेट में दर्द हुआ और उन्होंने मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में न्यूनतम वेतन न बढ़ाए जाने की याचिका पेश की और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर स्थगन आदेश (स्टे) जारी कर दिया फलस्वरूप एक माह बाद प्रदेश के लाखो मजदूरों का बढ़ा हुआ वेतन कम कर दिया गया इस पर सीटू ने उच्च न्यायलय में इंतरवीनर (हस्तक्षेपकर्ता) बन हस्तक्षेप किया सीटू के प्रदेश अध्यक्ष रामविलास गोस्वामी और प्रदेश के महासचिव प्रमोद प्रधान ने कहा की उक्त स्थगन के खिलाफ सीटू ने अदालती हस्तक्षेप के साथ साथ पूरे प्रदेश भर में सरकार पर दबाव पैदा करने के लिय लगातार प्रदेश के जिलाधीश और श्रम विभाग ऑफिसों पर धरने दिए इंदौर हाईकोर्ट में सीटू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बाबूलाल नागर ने न्यूनतम वेतन के सवाल पर मजदूरों का पक्ष बखूबी रखा फलस्वरूप हाईकोर्ट इंदौर की खंडपीठ ने उक्त स्थगन को खारिज कर दिया है यह मजदूरों की एतिहासिक जीत है सीटू नेता राम विलास गोस्वामी और प्रमोद प्रधान ने मध्यप्रदेश की सरकार और मध्यप्रदेश के श्रम आयुक्त से मांग करते हुए यह कहा है कि यह स्थगन 1 अप्रैल 2024 से हो रहे भुगतान के खिलाफ था जो खारिज हो गया है अब एक अप्रैल 2024 से श्रमिको का एरियर सहित भुगतान सुनिश्चित कराया जाए
सीटू ने प्रदेश के आम मजदूर और कर्मचारियों से एकता बनाए रखने की अपील की है

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