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संविधान की प्रस्तावना में भी संशोधन कर सकती है संसद: सुप्रीम कोर्ट

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट नी ने संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए ध 'समाजवाद' व 'पंथनिरपेक्ष' शब्दों काको हटाने की मांग वाली याचिकाएं क सोमवार को खारिज कर दी। कोर्ट नने 42वें संविधान संशोधन के जरिये प्रस्तावना में जोड़े गए इन दोनों शब्दों को 44 वर्ष बाद • चुनौती दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने समय बाद चुनौती देने का कोई न्यायोचित आधार नजर नहीं आता। याचिका पर विस्तार से विचार करने की जरूरत नहीं लगती।

कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि संविधान जीवंत दस्तावेज है। संसद को संविधान संशोधन की शक्ति प्राप्त है। यह शक्ति प्रस्तावना में संशोधन तक विस्तारित है।

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