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नशा नाश की जड़ है : इंजी.अशोक साकेत



तम्बाकू, बीड़ी, गुटखा, शराब,गांजा, कोरेक्स, सभी प्रकार की नसीली गोलियां मानव जीवन को प्रभावित करते हैं। यह सभी पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो है ही तामसिक होने के कारण हमारे नैतिक और आध्यात्मिक पतन के कारण भी है नैतिक पतन होने के कारण आपराधिक प्रवृत्ति निर्मित होती है।
हमारे नैतिक मूल्यों का ह्रास होने के कारण हमारा आत्मबल भी क्षीण हो रहा है। " आज तम्बाकू, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी यहाँ तक की कुछ जगह शराब भी सामाजिक व्यवहार और प्रतिष्ठा के पदार्थ बन गए हैं " दैवीयगुण वाला पान भी तम्बाकू के साथ प्रयुक्त होने के कारण अपनी पवित्रता और औषधीय गुणों से रहित हो गया है। शास्त्रों ने इन पदार्थो के सेवन का निषेध किया है और पाप की श्रेणी में रखा है। " फिर भी व्रत, उपवास, कथा-कीर्तन, तीर्थ,यज्ञादि वैवाहिक आयोजन के पवित्र अवसरों पर भी तम्बाकू और उसके उत्पाद का धूम्रपान के रूप में सेवन करने की सामाजिक कुप्रथा बन गयीं हैं।" यदि इन बुराइयों को रोकना है तो शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करने होगें, *शिक्षकों की नियुक्ति इसी आधार पर की जानी चाहिए कि वह आजीवन नशा नहीं करेंगे और विद्यार्थियों को भी प्रेरणा देगे।शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता हैं अत: आधुनिक शिक्षा के साथ ही चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का विकास भी उनकी जिम्मेदारी होनी चाहिए। समाज को भी नशा मुक्त और चरित्र निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। इससे अपराध कम हो सकते हैं अन्यथा अपराध रोकना किसी भी सरकार के लिए असम्भव है।
#इंजी_अशोक_साकेत #नसा_नास_की_जड़_है

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