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क्षमा वाणी पर्व

गजल
"क्षमा वाणी पर्व"

1. क्षमा वाणी पर्व आया, दिलों में प्रेम जगाए,
क्रोध, द्वेष को छोड़कर, हर मन को निर्मल बनाए।

2. अहंकार को मिटाकर, क्षमा का हो श्रृंगार,
इस पर्व से सीखें हम, मोक्ष की हो तैयारी अपार।

3. जिनधर्म की राह पे, क्षमा का मान बड़ा,
संयम से सजाए जीवन, अहिंसा का हो ध्वज तना।

4. माफी मांगें सबसे, दिल से हर गलती स्वीकार,
दिगंबर की शिक्षा से, हो जीवन का उद्धार।

5. क्षमा ही है सच्ची साधना, मुनियों का यही विचार,
क्षमा पर्व मनाकर, जीवन को करें पवित्र और उदार।

कवि अंकित जैन
नौगांव जिला छतरपुर मप्र
मो. 9479666123

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