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आखिर तेज तर्रार सीएमएस भी चीफ फार्मासिस्ट के आगे नतमस्तक

*आखिर तेज तर्रार सीएमएस भी चीफ फार्मासिस्ट के आगे नतमस्तक*

*अभी हाल ही में आए सीएमएस को भी लोगो ने अपनी बातो में फंसा ही दिया*

*सीएमएस साहब के पास कान भरने वालों की कमी नहीं*

*सीएमएस साहब से गलत काम को सही कराने में कुछ कर्मचारी पूरी तरह हो रहे कामयाब*

पिछले सात आठ महीनों से जिला चिकित्सालय के चीफ फार्मासिस्ट बी एन सिंह के खिलाफ शिकायत की जांच हो रही है कभी सीएमओ के यहां से आए पत्र को महीनो दबा दिया जाता है कभी जांच करने को कहकर टाल दिया जाता है यही जिला चिकित्सालय में चल रहा किंतु लगभग डेढ़ महीने पहिले उसी छः महीने पहले शिकायत को जिलाधिकारी महोदया को साक्ष्यो के साथ दिया गया और सीधे जिला चिकित्सालय के सीएमएस को फॉरवर्ड कराया गया जिसमे सीएमएस साहब ने जांच टीम बनाकर अपनी आख्या देने को कहा जांच टीम ने दोनों पक्षों से पूछताछ कर अपने अपने साक्ष्यों को देने को कहा जिसमें हमने साक्ष्य भी दिए और गवाह भी नतीजा यह रहा की हमसे कहा गया कि इनको इस बार माफ कर दीजिए आगे से गलती नही होगी पर बात आम जनमानस से जुड़ी है तो माफ करने का सवाल ही नहीं इस पर जांच टीम ने चीफ फार्मासिस्ट बी एन सिंह का पटल बदलते हुए उनको उनके तैनाती पटल ब्लड बैंक भेजा और इमरजेंसी में दूसरे चीफ फार्मासिस्ट को नियुक्त किया पर इनके खिलाफ जो शिकायत हुई उसका पर्याप्त दंड इनको नहीं मिला क्युकी यह पहले से ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे थे क्योंकि जब इनकी तैनाती पटल ब्लड बैंक था तो यह इमरजेंसी में चीफ फार्मासिस्ट के पद पर कैसे और क्यों थे इतने वर्षो से यह इमरजेंसी में चीफ फार्मासिस्ट कैसे थे जबकि इनका तैनाती पटल ब्लड बैंक में चीफ फार्मासिस्ट का पद रिक्त था अगर ब्लड बैंक में पद रिक्त था तो यह इमरजेंसी की ड्यूटी किसके आदेश पर कर रहे थे
अब सवाल जवाब जरूर होगा क्योंकि यह अब छोटा मुद्दा नहीं बहुत बड़ा मुद्दा है और इसमें कौन कौन शामिल है जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे सबकी जानकारी सभी के सामने होना चाहिए और जो भी लोग गलत हो उन पर बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

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