logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

प्रवेश_निषेध_है


पहले हमारे वाद्ययंत्र तोड़े गये
फिर हमारे लोकगीतों का सुर बदला गया
फिर हमारे कंठ में भरी गई भाषा
फिर हमारी आवाज का जादू खत्म करने
मरोड़ी गई हमारी गर्दन आहिस्ता-आहिस्ता
फिर हमारे मस्तिष्क में भरा गया धर्म

फिर तोड़ा गया हमको छोटे-छोटे निवाले में
फिर उठाया गया हमारा आंगा 'देवगुड़ी' से
फिर गढ़ा गया उसे महीन कारीगरी से
फिर मिटाया गया हमारा टोटम
फिर हमें पहनाए गए पूरे कपड़े
फिर हमें सभ्यता के नेमप्लेट पर सजाया गया
फिर हमारी नीलामी पर लुटाई गई हमारी ही संपदा
फिर ठूँसा गया हमें अजायबघरों में
फिर हम पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म

फिर हमें बताया गया कि हम
इस दुनिया के सबसे अनोखे प्राणियों में से एक हैं
फिर एक दिन सारी दुनिया का विमर्श
अपने निष्कर्ष की पाण्डुलिपि के साथ
हमारे घर की चौखट पर उकड़ू बैठा मिला

फिर हमारी आत्मा, हमारी देह पर एक ठप्पा लगाया गया
जिस पर लिखा था 'जंगली'
जिनका मनुष्यों की बनाई हुई दुनिया में प्रवेश निषेध है।

177
4600 views

Comment