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"सुप्रीम" फैसले से खुला स्थायी समिति के गठन का रास्ता, दिल्ली में रफ्तार पकड़ेंगे विकास कार्य; BJP को भी होगा फायदा

नई दिल्ली। उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त एल्डरमैन की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की मोहर लगने से दिल्ली में स्थायी समिति के गठन का रास्ता खुल गया है। महापौर डॉ. शैली ओबेरॉय ने वार्ड कमेटी से लेकर स्थायी समिति के गठन का मामला इसलिए लंबित कर रखा था क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था।

एलजी ही 10 ऐसे सदस्य जिनके पास निगम से संबंधित प्रशासनिक अनुभव है उन्हें मनोनीत कर सकते हैं। जबकि विवाद इस बात पर था कि यह सरकार की सलाह से होना चाहिए। इसी मामले को लेकर आप सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी।
दिल्ली के विकास को मिलेगी रफ्तार
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से दिल्ली के विकास को सीधा लाभ मिलेगा। क्योंकि वार्ड कमेटियो के गठन न होने की वजह से स्थानीय स्तर पर निगम के कार्यों की निगरानी नहीं हो पा रही है। साथ ही लोगों की समस्या पर सीधा काम नहीं हो पा रहा है।

इतना ही नहीं वार्ड कमेटियों के गठन न होने की वजह से स्थायी समिति का गठन भी नहीं हो पा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से इन 12 वार्ड कमेटियों और एक स्थायी समिति का गठन संभव हो पाएगा। 10 सदस्यों की नियुक्ति पर मोहर लगने से सीधा फायदा भाजपा को होगा। क्योंकि इन सदस्यों का राजनीतिक रिश्ता भाजपा से हैं।

कैसे होगा वार्ड कमेटी का चुनाव?
वार्ड कमेटी के चेयरमैन से लेकर डिप्टी चेयरमैन व स्थायी समिति के सदस्य के चुनाव के लिए महापौर को निगमायुक्त को इन कमेटियों के गठन का आदेश देना होगा। इसके बाद निगमायुक्त इन कमेटियों के चुनाव के लिए तारीख तय करेंगे। जबकि महापौर इन 12 वार्ड कमेटियों के चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी तय करेंगे।

इसके लिए नामांकन भी मांगे जाते हैं। जिसके बाद तय तारीख पर चुनाव होता है। यह चुनाव निगम मुख्यालय में होते हैं।

वार्ड कमेटियों से ही तय होगी स्थायी समिति पर कब्जे की भूमिका
दिल्ली नगर निगम में स्थायी समिति सबसे मजबूत कमेटी है। पांच करोड़ से ज्यादा राशि के लिए किसी एजेंसी को कार्य देना हो या फिर टेंडर देना हो इसका निर्णय स्थायी समिति ही लेती है। इतना ही नहीं ले आउट प्लान पास करने का अधिकार भी स्थायी समिति को है।

ऐसे में इस पर जिसकी सत्ता होगी उसको सर्वाधिक लाभ होगा। इसलिए चाहे आप हो या फिर भाजपा दोनों मिलकर इस पर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं। स्थायी समिति के गठन में यह 10 सदस्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि 12 वार्ड कमेटी में से एक-एक सदस्य स्थायी समिति के लिए भी निर्वाचित होकर आना है।

एलजी नियुक्त एल्डरमैन से भाजपा को होगा फायदा
इन एल्डरमैन को वैसे सदन में वोटिंग का अधिकार तो नहीं है, लेकिन वार्ड कमेटी में चेयरमैन से लेकर डिप्टी चेयरमैन और स्थायी समिति के सदस्य के लिए यह एल्डरमैन वोट कर सकते हैं।

उपराज्यपाल नियुक्त एल्डरमैन से भाजपा को ही फायदा होगा क्योंकि नरेला, सिविल लाइंस और मध्य जोन की वार्ड कमेटी में भाजपा के पास चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन और स्थायी समिति का सदस्य चुनने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। एल्डरमैन जब वोट करेंगे तो उससे भाजपा को फायदा होगा।

10 एल्डरमैन से ऐसे बनेगा स्थायी समिति की सत्ता का गणित
स्थायी समिति में कुल 18 सदस्य होते हैं। ऐसे में छह सदस्य सदन से चुने जाते हैं जबकि प्रत्येक वार्ड कमेटी से एक-एक सदस्य चुनकर आता है तो इससे 12 सदस्य चुने जाते हैं। स्थायी समिति का चेयरमैन बनने के लिए उम्मीदवार को 10 सदस्यों की जरूरत पड़ेगी।

फिलहाल की बात करें तो 12 में चार जोन (नजफगढ़, शाहदरा साउथ, शाहदरा उत्तरी और केशवपुरम) में भाजपा के पास सीधा बहुतम है। जबकि आप के पास वैसे तो आठ जोन में बहुमत हैं, लेकिन नरेला, सिविल लाइंस और मध्य जोन में एल्डरमैन की नियुक्ति से यहां से चुनकर आने वाले सदस्य को लेकर संशय है। इससे भाजपा को फायदा हो सकता है।

किस पार्टी का चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन बनेगा?
जबकि पांच जोन ( रोहिणी, सिटी एसपी, करोल बाग, पश्चिमी, दक्षिणी) में सीधा बहुमत है। ऐसे में जोन नरेला, सिविल लाइंस और मध्य जोन में जीत से यह तय होगा कि किस पार्टी का चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन बनेगा। हालांकि कमलजीत सहरावत जो कि सदन से स्थायी समिति की सदस्य चुनी गई थीं।

उनके सांसद बनने के बाद हुए इस्तीफे से इसका फायदा आप को होगा। क्योंकि सदन से छह सदस्यों के लिए जब वोटिंग हुई थी तो प्राथमिकता के आधार पर हुई थी। अब एक पद के लिए वोटिंग होगी तो सीधे एक सदस्य को चुनने होंगी। इसमें सदन में आप के पास ज्यादा संख्या होने की वजह से आप को फायदा होगा।

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