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मेरी अंतिम अभिलाषा को पूर्ण तुम करना ।। हिमांशु पाठक

### मेरी अंतिम अभिलाषा को पूर्ण तुम करना ।
हिमांशु पाठक
जीवन के हर मोड़ पर, मैंने अनगिनत सपने देखे, अनगिनत ख्वाहिशें संजोईं। लेकिन अब, जब मेरी जीवन की शाम ढल रही है, कुछ इच्छाएँ ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना मेरे लिए संभव नहीं है। इसलिए, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि मेरी अंतिम अभिलाषा को तुम पूर्ण करो।

जब मैं इस संसार से विदा लूँगा, मेरी इच्छा है कि तुम उन लोगों की मदद करो जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। मेरे पास जो भी थोड़ी-बहुत संपत्ति है, उसे उन लोगों तक पहुँचाओ जो भूखे हैं, जिन्हें रहने का स्थान नहीं है, और जिनके पास शिक्षा का साधन नहीं है। यह मेरी सबसे बड़ी अभिलाषा है कि मेरे जाने के बाद भी, मैं किसी न किसी रूप में समाज की सेवा करता रहूँ।

दूसरी मेरी अभिलाषा यह है कि तुम हमारे परिवार को एकजुट रखो। परिवार के हर सदस्य को प्रेम और सम्मान का महत्व समझाओ। जब भी कोई कठिनाई आए, एक-दूसरे का सहारा बनो और जीवन की हर चुनौती का सामना मिलकर करो।

तीसरी और अंतिम अभिलाषा यह है कि तुम अपनी जिंदगी को पूरी तरह से जियो। अपने सपनों का पीछा करो और कभी हार मत मानो। जीवन में कई कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन उन्हें पार करके ही सफलता मिलती है। अपने जीवन को ऐसे जियो कि जब तुम्हारा समय आए, तो तुम्हें किसी बात का पछतावा न हो।

मेरी यह अंतिम अभिलाषा है कि तुम मेरे इन विचारों को अपनाओ और उन्हें अपने जीवन में उतारो। मैं जानता हूँ कि तुम इसे अवश्य पूरा करोगे, और मेरे जाने के बाद भी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।

तुम्हारे साथ बिताए हर पल को मैं हमेशा याद रखूँगा और हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा। मेरी अंतिम अभिलाषा को पूर्ण करने का वचन दो।

आपका,
हिमांशु पाठक पारिजात
हल्द्वानी

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