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झारखंड हाई कोर्ट ने कनहर परियाेजना में देरी पर जताई नाराजगी, मुख्य सचिव को किया तलब

रांची 10 जुलाई : झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू एवं गढ़वा में सिंचाई के लिए प्रस्तावित कनहर बराज परियोजना में देरी पर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी की जताई है।कोर्ट ने बुधवार काे प्रथम पाली में मामले में मुख्य सचिव, जल संसाधन सचिव, वन सचिव और वित्त सचिव को कोर्ट में तलब किया। इसके बाद यह ये सभी अधिकारी कोर्ट में द्वितीय पाली में सशरीर उपस्थित हुए।
कोर्ट ने उनसे मौखिक कहा कि वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने पांच साल में इस परियोजना को पूरी होने का टाइमलाइन दिया था लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को कनहर बराज परियोजना पूरा करने को लेकर टाइम फ्रेम प्रस्तुत करने एवं कनहर बाराज के पूरा नहीं होने तक गढ़वा, पलामू के लोगों को लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। मामले के अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। कोर्ट ने सरकार द्वारा कनहर बैराज पूरा करने के लिए आठ साल का समय मांगे जाने को गंभीरता से लिया।
कोर्ट ने सरकार के इस शपथ पत्र को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने मौखिक कहां कि वर्ष 2009 से कनहर परियोजना को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई वर्ष 2024 तक चल रही है लेकिन राज्य सरकार कनहर बराज परियोजना को लेकर उदासीन बनी हुई है। झारखंड के पलामू, गढ़वा क्षेत्र में सुखाड़ की स्थिति वर्षों से देखी जा रही है लेकिन वहां सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कोई सकारात्मक कदम राज्य सरकार ने अब तक नहीं उठाया है।
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कनहर बराज परियोजना को पूरा करने को लेकर आठ साल का समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने मौखिक कहा कि राज्य सरकार की ओर से बार-बार शपथ पत्र दाखिल किया जा रहा है लेकिन अब तक पर कनहर बराज परियोजना को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। कनहर बराज परियोजना को पूरा करने को लेकर हाई कोर्ट गंभीर है। सरकार द्वारा वर्ष 2020 में इस परियोजना को पांच साल में पूरा करने का दावा किया गया था लेकिन यह दावा पूरा नहीं हुआ, जो इस बात का संकेत करता है कि राज्य सरकार कैसा काम कर रही है।

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