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बिगुल बजाएं

अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल,जबलपुर, मध्यप्रदेश
(साप्ताहिक फेसबुक सृजन कार्यशाला)
स्वयं को पाषाण की तरह मजबूत बनाएं
शिर्षक - "बिगुल बजाएं"
विधा - कविता

स्वयं को पाषाण की तरह मजबूत बनाएं।
आंधी तूफान आएं- मगर मत घबड़ाएं।
सर पर हाथ रखा है हमारे, मालिक का।
विश्व बंधुत्व कायम हो, बिगुल बजाएं।।

नाकामयाबी ख़्वाब में कभी नहीं आए।
करम हमारे सेर पर सवा सेर बन जाएं।
झुक-टूटने की कभी तालीम नहीं पाई।
साहिल को चूम विजय झंडा फहराएं।।

पराजय को, विजयोत्सव का प्रारंभ मानें।
थकना फितरत नहीं , बढ़ना ही धर्म जानें।
स्वयं को पाषाण की तरह मजबूत बनाएं।
सख़्त भुजाएं, कर्तव्यनिष्ठ पथरिली रानें।।

गिर गिर कर उठना, कालचक्र से सीखा।
आतंकी शत्रुओं पर, वार करें हम तीखा।
सौहार्दपूर्ण हैं वीर, दुष्टजनों के प्रतिकारी।
हलाहलपान करना, नीलकण्ठ से सीखा।।

डॉ. कवि कुमार निर्मल_✍️
DrKavi Kumar Nirmal (Facebook)
Instagram - k.k.nirmal2009

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