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मतदान के बाद जीत-हार पर लगने लगे दांव

क्या मतदाता की चुप्पी चलाएगी साइकिल या मोदी योगी के नाम का बजेगा डंका खिलेगा कमल

मतदान के बाद जीत-हार पर लगने लगे दांव

कौन जीतेगा, किसकी होगी हार

नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव पर ही चर्चा।

#हरदोई:लोकसभा चुनाव हरदोई व मिश्रिख का खत्म हो गया हैं, लेकिन चुनाव को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।लोकसभा मतदान के बाद अब जीत-हार के कयास लगने शुरू हो गए हैं और इसके साथ ही प्रत्याशियों पर दांव भी लगने लगे हैं। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार व राजनीतिक दलों के समर्थकों से क्षेत्रवार मतदान व वोटों के आंकड़ों को जुटाने में लग गए हैं, तो कहीं धोखे व पाला बदलने की भी खबरें सामने आ रही है। कोई कहता है कि 4 जून तक सब सामने आ जाएगा।

बाजारों से लेकर चाय की दुकान, पान की दुकान, सार्वजनिक चौराहों, पर पार्टियों के कार्यकर्ता के साथ-साथ चुनाव में दिलचस्पी रखने वाले लोग भी अपने-अपने आंकड़े बताकर जीत का दावा-प्रतिदावा कर रहे हैं।जीत-हार के दावों के बीच अब कोई शर्त लगाने की भी चुनौती दे रहा है। एक ओर सपा के समर्थक जीत के आंकड़े गिना रहे हैं तो दूसरी ओर बीजेपी के समर्थक योगी मोदी के नाम पर जीत के लिए आश्वस्त हैं।‌

मतदान के दूसरे दिन हालांकि सभी की जुबां पर चुनाव की चर्चा है।कौन जीतेगा, कौन हारेगा और कौन रहेगा दूसरे नम्बर पर, किसका दबदबा रहेगा तथा जीत-हार में कितना अंतर होगा। देश में किसकी सरकार बनेगी तथा किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इस पर भी लोग मोल-भाव कर रहे हैं। शांतिपूर्ण संपन्न हुए चुनाव के बाद अब सभी के जुबान में हार-जीत की समीक्षा का दौर तेजी से शुरू हो गया है. वहीं राजनीतिक पंडित भी अपना गुणा-भाग लगा कर चुनावों के परिणाम निकालने में लगे हैं और जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, इस पर भी हर घंटे लोगों के दावे बदलने लगे हैं। दूसरी ओर मतदाताओं की चुप्पी ने भी प्रत्याशियों व राजनीतिक दलों की धड़कने बढ़ने पर लगे हुए हैं

हार-जीत को लेकर लगने लगी बाजियां

चुनाव के इस दौर में हार-जीत के लिए छोटे से लेकर बड़े स्तर तक बाजियो का भी दौर शुरू हो गया है. पाचस रुपए से लेकर लाखों रुपये तक की बाजियां लगने लगी है। जीत व हार के मंथन के बीच दावों को लेकर लोगों की तकरारें भी बढ़ गई है और बातों ही बातों में लोगों के सुर भी तेज होते हुए दिखाई दे रहे हैं

जीत पर अड़े रहने के कारण दावे को लेकर तल्खियाँ भी बढ़ गई है. गांव से लेकर शहर तक अमूमन यही स्थिति है कि चुनाव के बाद हार-जीत के मामले को लेकर हो रही बहसें विवाद का रूप भी लेनी लगी हैं।

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