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गर्मी में पशुओं को अत्यधिक गर्मी एवं गर्मी के प्रकोप (हीट स्ट्रेस) से बचाने के लिए हमेशा आगे रहें, पुण्य मिलता है : दीपांजली

सरायपाली : संतलाल बारिक की रिपोर्ट

महिला कांग्रेस के प्रदेश सचिव एवं सरायपाली विधानसभा प्रभारी श्रीमती दीपांजली बारिक ने कहा कि गर्मी तेजी से बढ़ रही है, गर्मी बढ़ने पर शरीर में पानी की कमी हो सकती हैं। पानी शरीर का एक महत्वपूर्ण तत्व हैं। शरीर में 65 प्रतिशत के करीब पानी होता है। शरीर के खून में 80 प्रतिशत पानी होती है। अतः शरीर में पानी की कमी आती है। दूधारू पशुओं का दूध कम हो जाता है। गाभिन पशुओं में गर्भपात हो जाता है, पशुओं में स्ट्रेस स्तर बढ़ता है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है। पशु पक्षियों को बुखार हो जाता है। समय पर पानी की पूर्ति न होने पर पशु निढ़ाल हो जाता है और मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए गर्मी से बचाव की व्यवस्था करना बहुत ही महत्वपूर्ण बिन्दु है।

गर्मी के समय आपको क्या सावधानी रखनी है। यह प्रत्येक पशुपालक और आम व्यक्ति को इसकी जानकारी होनी चाहिए। तमाम ऐसे पशु है जो निराश्रित हैं उनके प्रति भी आपको दया का भाव रखना है। उनके लिए भी व्यवस्था करनी है। उनके लिए आप घर के बाहर पानी की व्यवस्था कर सकतें हैं। पक्षियों के लिए छत पर पानी की व्यवस्था कर सकतें हैं, जो भी पानी रखें उसको आप समय-समय पर बदलते रहें और पानी को छायादार स्थान पर ही रखें। गर्म पानी पशु पक्षियों को नुकसान कर सकता हैं। यदि पशु पक्षी बहुत हॉफ रहा हो, कमजोरी और थकान महसूस कर रहा हो मुंह से लार टपक रही हो, उसके हृदय की गति बढ़ गयी हो और वह निहाल पड़ गया हो तो यह लक्षण गर्मी से होने वाले हीट स्ट्रेस के लक्षण हो सकतें हैं। तत्काल नजदीकी पशु चिकित्साधिकारी से सम्पर्क करें और इलाज कराये। भार ढ़ोने वाले या काम करने वाले पशुओं को गर्मी के समय 12 बजे से 03 बजे तक अवश्य आराम दें। 37 डिग्री से अधिक तापमान होने पर इस नियमों का पालन आवश्य करें अन्यथा पशुओं के प्रति क्रूरता का अपराध माना जायेंगा। अपने पालतू पशुओं को नियमित रूप से नमक संतुलित पशुओं आहार मिनरल मिक्चर प्रतिदिन दें। इससे दुधारू पशुओं के दूध में कमी नहीं आयेंगी। पशुओं में स्ट्रेस नहीं होगा। स्ट्रेस आने से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है और विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती है। जन सामान्य से अनुरोध है कि पशुओं के प्रति दया का भाव रखते हुए गर्मी और लू से बचाने के लिए उपरोक्त बताये गये उपायों को खुद करें और अन्य व्यक्तियों को जागरूक कर प्रेरित करें। यह पुण्य का कार्य भी है, और आपको सुकून भी मिलेगा.

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