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एक बूंद जल अमृत जीवन का आधार

जीवन की सभी बुनियादी जरूरतों में पानी सबसे महत्वपूर्ण है। पानी हमारे लिए अनमोल हैं जिसका शायद कोई मोल नहीं हो सकता और खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी सीमित मात्रा में है तो हम कल्पना कर सकते हैं की वहां पानी का कितना बड़ा योगदान है। पानी की तड़प एक प्यासा व्यक्ति ही महसूस कर सकता है जो शायद एक बूंद के लिए भी संघर्ष करता है और हां हो सकता है की एक दिन वह भी आ जाए जब संपूर्ण विश्व को इस पानी की एक बूंद के लिए तरसना पड़े। पानी सार्वजनिक संपदा है और सामुदायिक सहयोग पर आधारित है भारत में प्रतिवर्ष 40 खरब क्यूब मीटर वर्षा जल प्राप्त होता है लेकिन उपलब्ध जल का एक तिहाई भाग ही उपयोग में आता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बड़े भूभाग में सुरक्षित पेयजल पहुंचना एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही सन 2050 तक पानी का औसतन खर्च 1168 अरब घन मीटर पहुंच जाएगा जबकि जल स्टोर क्षमता 1123 बिलियन घन मीटर ही होगी देश में उपलब्ध सतही जल का 70% भाग बुरी तरीके से प्रदूषित हो गया है। प्रदूषित पेयजल एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है पानी की मांग न केवल घरेलू उपयोग बल्कि सिंचाई और उघोग के लिए भी बढ़ती जा रही है। भारत नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार सन 2030 तक देश का पानी खत्म होने की कगार पर आ जाएगा और पानी की मांग दुगनी हो जाएगी केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार देश में भूमिगत जल का स्तर तेजी से गिर रहा है और साथ ही साथ देश की जीडीपी में भी 6% परसेंट के साथ गिरावट देखी जा रही है और लगभग 40% परसेंट लोगों तक पीने के पानी की पहुंच खत्म हो रही है। देश में उपलब्ध जल में से केवल राजस्थान की जनसंख्या को 5% परसेंट जल की आवश्यकता है लेकिन बहुत दुख की बात है कि राजस्थान को केवल 1% परसेंट पानी ही उपलब्ध होता है सोचने वाली बात तो यह है कि राजस्थान का बड़ा भूभाग स्तर पिछले 10 वर्षों में 5 से 10 मीटर नीचे गया है यानी कुल 236 ब्लॉग में 1/ 3 भाग डाक ज़ोन में जा चुके। पानी का मुख्य स्रोत नदियां तालाब झील व कुएं होते हैं पर यह पानी के मुख्य स्रोत आज खुद पानी के लिए तरस रहे हैं। देशभर में पिछले 10 सालों में करीब करीब 30 फीसदी नदियां सूख चुकी है और पिछले 70 सालों में 45 हजार नदियां 20 लाख तालाब और झीलें पूर्णता पानी रहित हो चुके हैं। राजस्थान में 11 प्रमुख नदियां हैं जिन्हें पेयजल व सिंचाई के काम में उपयोग करते हैं इन में से ज्यादातर बरसाती नदीयां है जो केवल बारिश के मौसम में बहती है कई इलाकों में तो ग्राउंड वाटर 40 मीटर से भी नीचे जा चुका है तालाबों और जलाशयों पर लोगों के द्वारा अतिक्रमण करके पानी के स्रोतों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक सार्वजनिक व निजी स्तर पर 40% पानी को व्यर्थ किया जा रहा है। एक सर्वे के अनुसार इस मे घरेलू उपयोग में आने वाली पानी की मुख्य भूमिका दर्शाई गई है जाने अनजाने में हम हमारे घर में पाए जाने वाले मीठे व ताजा पानी को अनावश्यक रूप से बेकार कर रहे हैं निसंदेह हमारे घरेलू कार्यों में पानी का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है पर यह कहां तक सही है की हम हमारे इस अनमोल पानी को यूं ही बेकार और व्यर्थ करते रहे जब की पानी के बिना जीवन शायद 1 दिन भी संभव ना हो । संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व के कुल जनसंख्या में से 20% लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है विश्व बैंक के अनुसार सभी भागों में पानी का दबाव महसूस किया जा रहा है जो हमारे लिए एक सोचने विचार के साथ-साथ चिंता का विषय भी है। राजस्थान भारत देश का सबसे बड़ा राज्य है राजस्थान का अधिकांश भाग मरुभूमि वाला है इसलिए राजस्थान जैसे शुष्क व अद्वशष्क राज्य में जल का महत्व और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि जीवन के सभी बुनियादी जरूरतों में पानी सबसे महत्वपूर्ण है। राजस्थान मे प्रतिवर्ष कहीं ना कहीं अकाल व सूखे की स्थिति जरूर पाई जाती है। राजस्थान की भौगोलिक स्थिति और जलवायु के कारण प्रदेश के अधिकांश भाग में वर्षा की मात्रा न केवल सीमित है बल्कि अनियमित भी है । राजस्थान में पेयजल संकट की स्थिति बहुत गंभीर है देश के एकमात्र मरूभूमि राजस्थान भू जल संकट के कगार पर है राज्य में पाई जाने वाली भूजल की 295 ब्लॉग में से 184 ब्लॉक बहुत ही गंभीर श्रेणी में आ चुके हैं इस हिसाब से हम अनुमान लगा सकते हैं की आधे से ज्यादा राज्य में जमीन में पाए जाने वाला पानी कभी भी समाप्त हो सकता है राजस्थान के 33 में से 19 जिले इस वक्त जल संकट का सामना कर रहे। राष्ट्रीय संघ के दल ने कहा है की अगले 30 वर्षों में भारत में पानी की समस्या बहुत कठिन हो जाएगी और इसकी शुरुआत शायद आज हम देख रहे हैं। वर्ल्डवॉच इंस्टिट्यूट के अनुसार हम एक ऐसे विश्व में हैं जिस में जल गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। जहां प्रतिवर्ष और 8 करोड़ लोग विश्व के जल संसाधन पर अपना हक जता रहे हैं वहीं बढ़ती जनसंख्या ने हमारे जल को भी प्रभावित किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले 30 वर्षों में संसार की जनसंख्या 70 % बढ़ जाएगी तब पानी की इस कीमत का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल होगा ऐसे देश जिनकी जनसंख्या करीब 7 अरब से अधिक है जल संकट का शिकार होंगे चिंता का विषय यह है की हमारा देश भारत भी इन में से एक है । आज आजादी के 70 साल के बाद भी हम ऐसा तंत्र भी विकसित नहीं कर सके जो हमारे पेयजल और सिंचाई योजनाओं को ठीक से लागू कर सके ।

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