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तालाब उड़ाही के नाम पर धड़ल्ले से हो रहे सरकारी खजाने का बंदरबांट

तालाब उड़ाही के नाम पर धड़ल्ले से हो रहे सरकारी खजाने का बंदरबांट

विभाग द्वारा तालाब उड़ाही घोटाले की खुल रहा पोल

नन्द कुमार सिंह/ब्यूरो राष्ट्रीय प्रसार

औरंगाबाद/बिहार- जल संसाधन विभाग पर पहले भी कितने बार आरोप लग चुके है परन्तु इस बार जो मामला सामने आया है यो राज्य और देश के सरकारी खजाने को खाली करने वाला है । जल संसाधन विभाग द्वारा तालाब उड़ाही के नाम पर जो स्टिमिट बनाया गया है वह चोंकाने वाला है । जिस तालाब के उड़ाही में 5 लाख का खर्च है उसका स्टिमिट 50 लाख से भी ज्यादा और जिस तालाब उड़ाही में 10 लाख का खर्च है उसका स्टिमिट 1 करोड़ से भी ज्यादा ।
ग्राम के हर गल्ली मुहल्ले में यह चर्चा तेज हो चुका है की आखिर इतने पैसे का क्या होगा ? पत्रकार द्वारा जब इसका तहकीकात किया गया तो जो मामला खुलकर सामने आया वह चोंका देने वाला है । आप भी सुनकर चौकने वाले है । पहले धरती की बात करे तो एक 100 फिट लंबा 100 फिट चौड़ा और 10 फिट गहरे तालाब के निर्माण के अधिकतम लागत राशि 10 लाख रुपया हो सकता है परंतु लघु जल संसाधन विभाग ने पुराने तालाब उड़ाही के नाम पर जो स्टिमिट बनाया है यो चौका देने वाला है । 90 फिट चौड़ा 90 फिट लंबा और 7 फिट गहरा तालाब उड़ाही में 52 लाख का स्टिमिट बनाया है ।यह मामला औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना अंतर्गत पतेया ग्राम का है,जिसके उड़ाही में अधिक से अधिक 6 लाख का लागत लग सकता है साथ मे आउटलेट और इनलेट निर्माण कार्य में अधिकतम 2 लाख । 10 लाख का भी खर्च मान कर चले तो ये 42 लाख का स्टिमिट ज्यादा क्यो बनाया गया । मैं इसके बावत पतेया तालाब पर कार्य कर रहे ठीकेदार राजेन्द्र कुमार से पूछा उसने जो बताया यो पत्रकार को आश्चर्यचकित कर दिया । 35 प्रतिशत कमीशन पहले जमा करना होता है । 20 प्रतिशत विभाग को कमीशन देना पड़ता है । 55/सिर्फ कमीशन में जाता है और 45/ ठीकेदार के हाँथ में आता है । अब आप बताये की जो ठीकेदार 55/कमीशन देकर काम लिया है यो धरती पर काम कितना करेगा । ठीकेदार की बात को सुनकर यह महशुस किया गया कि तालाब उड़ाही के नाम पर वर्क से 10 गुणा ज्यादा स्टिमिट बनाकर कमीशन के रूप में सरकारी फंड को निजी प्रोपर्टी बनाया जा रहा है जिससे बिहार के सरकारी खजाने और जनता पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है ।

आप लोग अगर यह सोच रहे है कि यह स्टिमिट सिर्फ पतेया तालाब पर बनाया गया है तो गलत सोच रहे है । पूरे औरंगाबाद जिले के तालाब उड़ाही को देखे तो इससे भी कही ज्यादा स्टिमिट मिलेगा-थवई तालाब पर 1 करोड़ 32 लाख, नादौरा तालाब पर 1 करोड़ 27 लाख,केताकी तालाब पर 65 लाख सहित जिले के सैकड़ो तालाब उड़ाही के नाम पर औसत से 10 से 20 गुणा ज्यादा स्टिमिट देखा जा रहा है । जिस तालाब उड़ाही में 5 लाख का खर्च है उसके नाम पर 50 लाख और जिसमे 20 लाख का खर्च है उसके नाम पर डेढ़ करोड़ का स्टिमिट बना दिख रहा है ।

मामला कमीशन खोरी का है

आप सभी को बताते चले कि पत्रकार द्वारा इस विभाग के कई मीडिया सूत्रों से पता चला कि जो ठीकेदार जितना ज्यादा कमीशन देता है उसके नाम पर उतना अधिक का स्टिमिट बना दिया जा रहा है । इसकी पुष्टि ठीकेदार द्वारा भी किया गया कि 50 से 60 प्रतिशत पैसा कमीशन के रूप में जमा करना पड़ता है साथ ही विभाग का कमीशन भी अलग से देना पड़ रहा है । 40/में मेरा भी पेट है फिर कितना काम करें ।
आश्चर्य यह है कि यह मामला सारे लोगो के जानकारी में हो रहा है ,पत्रकार द्वारा जितना जगह पूछ ताछ किया गया किसी ने आश्चर्य व्यक्त नही किया उसने बेवाक जबाव दिया यह तो हर जगह हो रहा है । अब आप बताये की औरंगाबादजैसे छोटे जिले में खरबो"" का फंड घोटाला है तो पूरे बिहार में कितना होगा ?

सरकार और वरीय पदाधिकारी क्या कर रहे हैं ?

सवाल अब यह उठ रहा है कि ये सभी कार्य सरकार और वरीय अधिकारियों की लेखनी से ही पास होते हैं फिर इतनी बड़ी चूक कैसे ? बहर हाल यह मामला जांच का विषय है जिसे सरकार और वरीय अधिकारियों को तत्काल जांच कर अवैध निकशी को रोकना चाहिए और गलत करने वाले को कानून का पाठ पढ़ाना चाहिए ।

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