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भागवत कथा के सातवें दिन भक्ति रस में डूबे श्रोताद्रोपदी चीर हरण प्रसंग सुन तन- मन की सुध- बुध खो बैठे श्रोता

श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान कथा का समापन


शाहगंज। विकासखंड क्षेत्र खुटहन के जगदीशपुर गांव में मुख्य यजमान रामचंद्र मिश्र के निवास स्थित चल रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान कथा के अंतिम दिन कथा व्यास जितेंद्र तिवारी जी महाराज ने ब्रह्म के स्वरूप निर्गुण- सगुण, भक्ति और भगवान, आत्मा और परमात्मा के बीच बहुत सुंदर ढंग से निरूपण किया।उन्होंने सुदामा चरित्र ,द्रोपदी चीर हरण, गोपी उद्धव संवाद ,यदुवंश श्राप की कथा, राजा परीक्षित के नाग डसने की कथा को सुना कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।भक्ति रस के भाव में श्रोता डूब गए।भक्ति के रंग का खुमार इस कदर चढ़ा कि लोग अपने ही स्थान पर मस्ती में नृत्य करते हुए अपने तन मन की सुध -बुध ही भूल गए। भक्ति के गीत और भजन प्रस्तुत किए गए।


सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर अंतर्यामी होते हैं।वह सबके मन की व्यथा और दशा सब जानते हैं। भगवान अपने भक्त के लिए सबसे बड़ा त्याग कर सकते हैं बशर्ते हमारे हृदय में छल कपट नहीं होना चाहिए।जिसके मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है वह उसी के वश में होता। भगवान के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है वह उसकी झोलियां भर देता है जैसा सुदामा की भरी थी।द्रोपदी चीर हरण का मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रोतागण निहाल हो गए।ईश्वर सर्वव्यापी हैं ।यदि हम उन्हें एक निष्ठ भाव से युक्त होकर सच्चे मन से पुकारेंगे तो वह अपने आप दौड़े चले आएंगे।अगर परमात्मा के प्रति हमारी सच्ची और अगाध श्रद्धा है तो पुकारने पर उन्हें किसी न किसी रूप में भक्तों को संकट से उबारने के लिए आना ही पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि संपूर्ण सृष्टि का रचयिता जो सर्व शक्तिमान है वह प्रेम और भाव का भूखा होता है। वह भक्तों के वश में होता है। जिसके साथ भगवान खड़ा होता है दुनिया उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती। द्रोपदी की लाज इसलिए बच गई क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनका अटूट विश्वास था।काश हमारे हृदय में भी द्रोपदी जैसा विश्वास उत्पन्न हो जाए तो फिर भगवान हमसे दूर नहीं है ।गोपी उद्धव संवाद श्रवण करके लोग प्रेमा भक्ति में डूब गये।उन्होंने कहा कि निर्गुण निराकार ब्रह्म अगम- अगोचर है। भक्तों के लिए सुगम नहीं है इसलिए सगुण ब्रह्म की उपासना अत्यंत सुलभ है।सगुण रूप की प्रेमा भक्ति के आगे ब्रह्म का निर्गुण निराकार स्वरूप फीका पड़ जाता है ऐसा प्रेम श्री कृष्ण के प्रति गोपिकाओं के हृदय में कूट-कूट कर भरा था।

उसी प्रेम के आगे उद्धव का निर्गुण ब्रह्म की उपासना का उपदेश प्रभाव हीन रहा। मुख्य यजमान द्वारा कथा व्यास जितेंद्र तिवारी जी महाराज का माल्यार्पण,श्रीमद् भागवत महापुराण पुस्तक ,अंग वस्त्रम और राधा कृष्ण की प्रतिमा भेंट करके स्वागत किया गया। इस अवसर पर बचई प्रसाद मिश्र ,ओमप्रकाश मिश्र,हर्षनाथ मिश्र, सहायक पशु चिकित्सक पंकज त्रिपाठी, सूर्यनाथ मिश्र,डॉ जय नारायण तिवारी ,दिनेश मौर्य, विजय प्रकाश तिवारी (साधू), ऊषा मिश्रा ,ममता दुबे,नेहा तिवारी, साधना मिश्रा, अभिषेक मिश्रा( चंचल) सनी यादव ,अरुण दुबे, इंद्रजीत मिश्र ,संतोष मिश्रा ,रघुवंश मिश्र,अशिता शुक्ला,आरती शुक्ला,लीलावती देवी, नीरज मिश्रा ,शिवम मिश्रा, मनीष मिश्रा सहित सैकड़ो क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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