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मन को प्रभु चरणो मे लगाने से होगा उद्धार

अमौली फतेहपुर

अमौली विकास खंड के कमासी गाँव मे चल रही श्रीमदभागवत कथा के तृतीय दिवस आचार्य राघव जी महाराज ने भगवान के अवतारों की कथा प्रसंग सुनाएँ।उन्होंने कहा जब धरती पर धर्म के विरुद्ध कार्य अधिक होने लगते है तो धर्म की स्थापना के लिए भगवान का अवतार हुआ करता है।उन्होंने कहा अगर मन दुख से भरा है तो हम दुखी नजर आएंगे।अगर मन में खुशी है तो हम प्रसन्न रहते हैं।हमारा मन या जिसे हम आध्यात्मिक हृदय कहते हैं वही हमारे व्यवहार को तय करता है।इसलिए सर्वोत्कृष्ट आध्यात्मिक अभ्यास है कि अपने मन को सहज और शांत बनाया जाए।मन को साध लेने से कई कार्य बन जाते है।मन ही व्यक्ति का दुश्मन होता है क्योकि मन की चंचलता से कई कार्य बिगड़ जाते है।मन को भगवान की शरण मे प्रभु के चरणो मे लगाना चाहिए तभी उद्धार होगा।कथा मे पहुँचकर युवा विकास समिति के प्रवक्ता आलोक गौड़ ने व्यास पीठ मे पूजन आरती किया।आचार्य पुष्पेंद्र चतुर्वेदी एवं निखिल मिश्र ने पूजन कराया।परीक्षित ज्ञानेंद्र द्विवेदी सहपत्नी गीता द्विवेदी सहित पवन पांडेय,अमित पान्डेय,सौरभ द्विवेदी,कृष्णा तिवारी,अनुपम मिश्र,मयंक द्विवेदी आदि रहे।कथा समापन पर आरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया गया।

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