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भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय में सरस डेयरी का प्रकरण विचाराधीन बावजूद उसके पूंजीवादी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए डेयरी बूथ संचालक को बेरोजगार करने पर प

आरके पुरम अहिंसा सर्किल पर जय साइन नाथ नाम से सरस डेयरी बूथ का संचालन करने वाले मयंक शर्मा ने नगर विकास न्यास कोटा पर आरोप लगाते हुए बताया है कि उनके द्वारा सन 2016 से उक्त सरस डेयरी बूथ का संचालन करके अपना तथा अपने परिवार का जीवन यापन किया जा रहा है, इस सरस डेयरी का संचालन करते हुए उन्हें लगभग 7 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, वही इस सरस डेयरी का उद्घाटन भी माननीय क्षेत्रीय विधायक श्री संदीप जी शर्मा के द्वारा दस्तावेजों को देखने के पश्चात किया गया था,उनके माता-पिता का स्वर्गवास भी उनके बचपन में ही हो चुका है तथा वह किराए से कमरा लेकर रहते हैं उनका घर का मकान तक नहीं है तथा पिछले वर्ष उन्होंने विवाह भी कर लिया है तथा उनका परिवार जीवन यापन हेतु पूरी तरह से इस डेयरी बूथ पर ही पर ही आश्रित है तथा उनके ऊपर जो भी कर्ज है उसका भुगतान भी उक्त सरस डेयरी बूथ के संचालक द्वारा ही किया जाता है

उक्त सरस डेयरी बूथ के दस्तावेज उन्हें कोटा डेयरी के पूर्व अधिकारी सतीश गगरानी द्वारा फर्जी बना कर दे दिए थे जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी तथा एसीबी की जांच में वह अधिकारी दोषी भी पाया गया है तथा उस अधिकारी के खिलाफ 76/2021 f.i.r. दर्ज है तथा वर्तमान में भी इस सरस डेयरी का मामला भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय में विचाराधीन है, कोटा डेयरी अधिकारियों द्वारा डेयरी बूथ आवंटन में हो रहे भ्रष्टाचार और फर्जीवाडे का उनके द्वारा खुलासा किया गया था

उनके द्वारा संचालित सरस डेयरी के पीछे यूआईटी का एक खाली भूखंड पड़ा हुआ था जिसे यूआईटी के द्वारा एक संस्था को आवंटित कर दिया गया है तथा भूखंड मालिक ने जानबूझकर उनके सरस डेयरी के पीछे एक गेट निकाल दिया है जबकि वहां पर अन्य 3 गेट और भी मौजूद है,तथा पार्किंग के नाम पर भूखंड मालिक उनके सरस डेयरी को हटवाकर उन्हें बेरोजगार करने हेतु प्रयासरत है, तथा मयंक का आरोप है कि पूंजीवादी व्यक्तियों के दबाव में यूआईडी के अतिक्रमण दस्ते द्वारा उन्हें लगातार परेशान करके उन्हें वहां से उनके द्वारा संचालित सरस डेयरी बूथ को हटा लेने की धमकी दी जा रही है, और नहीं हटाने पर तोड़ देने की धमकी भी दी जा रही है जिसके चलते मयंक तथा उनकी पत्नी मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हो चुके हैं

उन्होंने कोटा कलेक्टर महोदय को पत्र लिखकर अपनी समस्या से अवगत कराया है तथा पत्र के माध्यम से उन्होंने कलेक्टर साहब को लिखा है कि अगर उनकी सरस डेयरी को यूआईटी अतिक्रमण दस्ते द्वारा पूंजीवादी व्यक्ति के दबाव में हटा दिया जाता है तो वह बेरोजगार होकर पूरी तरह से रोड पर आ जाएंगे, और हो सकता है वह तथा उनका परिवार इस सदमे को बर्दाश्त ना कर पाए और उनको मजबूरी में आत्महत्या जैसा गलत कदम उठाना पड़ जाए इसलिए उन्होंने कलेक्टर साहब से मदद की गुहार लगाई है

मयंक ने बताया कि इस संदर्भ में उनके द्वारा यूआईटी सचिव,मंत्री महोदय श्री शांति धारीवाल जी ,मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ मानव अधिकार आयोग में भी पत्र भेजे गए हैं, साथ ही कई सामाजिक संस्थाओं एवं संगठनों ने भी उनके रोजगार की सुरक्षा की मांग हेतु पत्र भेजे हैं

वही मयंक शर्मा ने यूआईटी के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहां है कि उनके द्वारा संचालित सरस डेयरी के पीछे जो प्लाट संख्या ओ.सी.एफ-1 आवंटित किया गया है वह पूर्व में सहरिया समाज के नाम आवंटित था जिसे यूआईटी द्वारा भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा करते हुए अपनी चहेती शिक्षा समिति संस्था को आवंटित कर दिया गया है,वहां अस्पताल का निर्माण कराया जाना है,तथा उक्त संस्था को पूर्व में भी विनोबा भावे नगर में भूखंड आवंटित किया जा चुका है,भूमि आवंटन में हुए घोटाले की जांच की मांग को लेकर उन्होंने आज एसीबी में परिवाद दर्ज कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है

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