जान्हवी जोशी -- साहित्य जगत में सकारात्मक संभावना जगाती एक बहुमुखी उदीयमान प्रतिभा
नयी दिल्ली। कोरोना महामारी की वजह से पिछले कुछ समय में हमारी ज़िन्दगी में अव्यवस्था, नकारात्मकता और निराशा के भावों की प्रधानता रही । इस बीच हम सबने बहुत कुछ खोया और ये भी जाना कि प्रकृति का न्याय पक्षपात रहित और कभी कभी बहुत क्रूर भी होता है । ये दौर हमें यह भी सीखा कर गया कि जीवन में सकारात्मक रहना और भौतिकता से ऊपर उठ कर ईश्वर प्रदत्त आध्यात्मिकता की तरफ खुद को मोड़ना और उसे अपने जीवन में अंगीकार करना कितना महत्त्वपूर्ण है। इन सभी कठिनाइयों के बीच जानी मानी शास्त्रीय नृत्य नृत्यांगना व एक नवोदित लेखिका जान्हवी जोशी ने अपनी पहली पुस्तक " जीवन सूत्र" द्वारा साहित्य जगत के आकाश में सूर्य की भांति उदीयमान होकर सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा ।
लेखिका "जान्हवी जोशी" दिल्ली की एक युवा इंजीनियरिंग की छात्रा हैं, जिन्हें ईश्वरीय कृपा से साहित्य सृजन का आशीर्वाद मिला है और उन्हें बचपन से ही लिखने की प्रेरणा मिलती रही है । "जीवन सूत्र" उनकी पहली प्रकाशित पुस्तक है। इसके अलावा जान्हवी एक प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना भी हैं। वह एक गैर सरकारी संगठन 'वंडर्स इंडिया' से भी जुड़ी हुई हैं, और समाज कल्याण के विभिन्न कार्यों में एक सक्रिय स्वयंसेवक की तरह कार्यरत रही हैं। जान्हवी जोशी ना सिर्फ युवाओं के लिए बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणादायी व्यक्तिव के रूप में अपनी जगह बनाने में सफल रही हैं और साथ ही साथ वो भविष्य के लिए भी असीम संभावनाएं भी जगाती हैं।
जान्हवी के अनुसार इस पुस्तक की रचना ईश्वरीय प्रेरणा और माता पिता के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं हो सकती थी। उन्होंने बताया की "जीवन सूत्र " के सृजन की सम्पूर्ण प्रक्रिया ने उन्हें आश्चर्यजनक रूप से जीवन के प्रति अटूट आस्था और आशा के नए आयामों से परिचित कराया।
जीवन सूत्र एक प्रेरणादायी स्वयं सहायता पुस्तक है जिसमें जीवन जीने की अद्भुत शिक्षाओं के साथ-साथ मृत्यु, प्रेम, परिवर्तन, प्रकृति, आशा, प्रेरणा, आध्यात्मिकता, जीवन की अलौकिकता एवं पारलौकिकता आदि विषयों जान्हवी द्वारा लिखित 50 लेखों और कविताओं का संकलन है। यह पुस्तक अद्भुत और अविश्वसनीय तरीके से उन लोगों के जीवन में आशा, प्रेरणा और ऊर्जा का संचार करती है जिन्होंने भ्रमवश जीवन के प्रति विश्वास और सकारात्मकता को पीछे छोड़ दिया है और जो जीवन के प्रति निराशा और उदासीनता का भाव रखते हैं।
जान्हवी इस पुस्तक के माध्यम से इसमें लिखित प्रत्येक विषय के लिए हर संभव एक नया आशावादी दृष्टिकोण देतीं हैं । इस में लेखिका ने यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि हम सभी इंसान हैं और जब तक हममें अपनी गलतियों से सीख लेने उन्हें दूर करने के लिए प्रतिबद्धता है, तब तक हमें नकारात्मक भावनाओं को रखने, गलतियाँ करने, पतन का सामना करने और अपनी कमियों को स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए क्योंकि सिर्फ और सिर्फ इस तरह ही हम हर दिन खुद के बेहतर संस्करण के रूप खुद को निखार सकते हैं और खुद के और समाज के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि "जीवन सूत्र" नामक यह किताब एक अद्भुत और अकल्पनीय रचना है और आज की परिस्थितियों में जनमानस के लिए यह ईश्वरीय वरदान और आशीर्वाद की तरह सामने आई है। जान्हवी अपने आप को सौभाग्यशाली मानती हैं कि ईश्वर ने इस रचना के सृजन के लिए उन्हें निमित्त चुना। लेखिका जान्हवी जोशी एक ऐसी युवा प्रेरक , ऊर्जावान और सकारात्मक शख्सियत के रूप में उभरी हैं जिन्हें जीवन में भ्रम और वास्तविकता, अलौकिकता और पारलौकिकता, कठिनाइयों और चमत्कारों के सह-अस्तित्व में विश्वास है। जिसके पास अटूट आस्था और विश्वास करने की अद्भुत क्षमता है और इसकी प्रामाणिकता को साबित करने का दृढ़ निश्चय व लगन भी है । जो कभी खुद भी आसानी से हार नहीं मानतीं हैं और दूसरों को भी इसी बात के लिए प्रेरित करतीं हैं।
सिर्फ इस किताब द्वारा ही नहीं, बल्कि वो अपनी कहानी द्वारा भी उन लोगों के लिए प्रेरणास्पद हैं जो कोरोना काल और जीवन की परिस्थितिजन्य महत्वहीन बाधाओं के कारण हार मान चुके हैं और अपने सपनों को पूरा करने का निश्चय छोड़ बैठे है।यह पुस्तक निश्चित रूप से जीवन जीने के तरीके पर आपके दृष्टिकोण को कम से कम किसी एक तरीके से बदल देगी । और समाज के प्रत्येक वर्ग या आयु वर्ग के लिए इस पुस्तक से कम से कम एक पसंदीदा अध्याय होना निश्चित है।
यह पुस्तक फ्लिपकार्ट, अमेज़ॅन और नोशन प्रेस पर पेपरबैक संस्करण के साथ ही किंडल संस्करण के रूप में भी उपलब्ध है।
https://linktr.ee/dontbejayjay
पुस्तक के कुछ अंश नीचे दिए हुए लिंक पर निशुल्क उपलब्ध हैं जिनको पढ़ कर इस किताब में दी गई शिक्षाओं के गहन अर्थ का अंदाज लगाया जा सकता है।
https://notionpress.com/read-instantly/1348979