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उच्च स्तरीय समिति के सदस्य शिक्षाविद गोपाल शर्मा की अध्यक्षता में समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न



सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों ने अपने-अपने सुझाव सांझा किए
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समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक आज कलेक्ट्रेट के बेतवा सभा कक्ष में संपन्न हुई। यह बैठक उच्च स्तरीय समिति के सदस्य प्रोफेसर व शिक्षाविद श्री गोपाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।

उच्च स्तरीय समिति के सदस्य प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने बैठक में वेबसाइट ucc.mp.gov.in की जानकारी दी तथा बैठक में उपस्थित सामाजिक राजनीतिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी सुझाव प्राप्त किये हैं, प्राप्त सुझाव व ओपिनियन के आधार पर समान नागरिक संहिता को आगे बढ़ाया जाएगा।

समिति के सदस्य श्री गोपाल शर्मा ने बैठक में कहा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू किया जाना है, इसके लिए योजना तैयार की गई है। अधिक से अधिक सुझाव प्राप्त करना ही जिसका उद्देश्य है। विचार विमर्श उपरांत इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक का अधिकार सभी को मिले महिला और पुरुष में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं हो, चाहे वह बालक हो बालिका हो भेदभाव नहीं होना चाहिए। परिवार इसका केंद्र बिंदु है। साथ ही उन्होंने विवाह संबंध में आवश्यक जानकारी देते हुए कहा कि जीवन में एक व्यक्ति को एक ही विवाह करना चाहिए के अलावा लिव इन रिलेशनशिप पर भी उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लिव इन में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। समाज को मिलकर आगे आना होगा। लैंगिक समानता का विकास होगा जिससे देश अग्रसर होगा। इन तमाम बिंदुओं पर यूसीसी लागू होना है की जानकारी उन्होंने बैठक में दी है, परंतु कानून लागू करने के पहले सुझाव प्राप्ति अति आवश्यक है को बैठक में उन्होंने दोहराया है।

उक्त बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रीति राकेश शर्मा और सामाजिक राजनैतिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस बैठक में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता, अपर कलेक्टर श्री अनिल कुमार डामोर, वन मंडल अधिकारी श्री हेमंत यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत चैबे, जिला पंचायत सीईओ श्री ओपी सनोडिया सहित गणमान्य नागरिक, मीडियाकर्मी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के संबंध में जो जानकारियां प्रस्तुत की गई तदानुसार

उपर्युक्त उदेश्य की पूर्ति हेतु समिति को सौंपे गए कार्य -

राज्य में प्रचलित विभिन्न व्यक्तिकध्पारिवारिक विधियों जिनमें विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक एवं लिव इन संबंधी व्यवस्थाएं सम्मिलित है, का समग्र अध्ययन करना।

अन्य राज्यों विशेषकर उत्तराखण्ड एवं गुजरात में अपनाए गए मॉडल ध् प्रक्रिया का अध्ययन कर उपयुक्त बिन्दुओं का परीक्षण करना।

राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता के लिए एक संतुलित एवं व्यवहारिक एवं विधिक संरचना प्रस्तुत करना।

विभिन्न हितधारकों (जन सामान्य, सामाजिक ध् धार्मिक संगठन, विधि विशेषज्ञ, अकादमिक विशेषज्ञ आदि) से सुझाव ध् आपत्तियां आमंत्रित कर उनका परीक्षण करना आवश्यकतानुसार जन सुनवाईध्परामर्श बैठकें आयोजित कर व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करना।

प्रस्तावित व्यवस्था में महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक प्रावधानों पर विचार प्रस्तुत करना।

लिव इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन एवं उनसे उत्पन्न अधिकारोंध्दायित्वों के संबंध में उपयुक्त सुझाव प्रस्तुत करना।

प्रस्तावित विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की विधिक जटिलता उत्पन्न न हो।

उपर्युक्त परीक्षण के आधार पर समिति एक सुविचारित प्रारूप विधेयक (ड्राफ्ट बिल) एवं विस्तृत प्रतिवेदन राज्य शासन को निर्धारित समयावधि 60 दिवस में प्रस्तुत करेगे इत्यादि से अवगत कराया गया है।

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