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सिविल डिफेन्स सोनभद्र की निष्क्रियता पर उठे सवाल, वार्डनों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन


**उपेक्षा से नाराज स्वयंसेवकों ने उठाए गंभीर बिंदु; नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और नियमित प्रशिक्षण की मांग की**

**रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र।** जनपद सोनभद्र में आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में प्रशासन का सहयोग करने वाले महत्वपूर्ण स्वयंसेवी संगठन 'सिविल डिफेन्स' की लंबे समय से चली आ रही निष्क्रियता को लेकर संगठन के वार्डन बंधुओं और स्वयंसेवकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को समस्त वार्डन बंधुओं की ओर से जिलाधिकारी सोनभद्र को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर संगठन को पुनः सक्रिय और प्रभावी बनाने की मांग की गई।

**15 अगस्त 2025 के बाद से उपेक्षा का शिकार हैं स्वयंसेवक**
जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि 15 अगस्त 2025 के बाद नामांकित हुए स्वयंसेवकों को आज तक काम करने का कोई अपेक्षित अवसर, प्रशिक्षण या संगठनात्मक मार्गदर्शन नहीं मिल सका है। इसके चलते बड़ी संख्या में युवाओं के भीतर निराशा और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

**ज्ञापन में उठाए गए मुख्य गंभीर बिंदु:**
1. **ट्रेनिंग और बैठकों का अभाव:** जॉइनिंग के बाद से स्वयंसेवकों के लिए कोई नियमित प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल या क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है।

2. **आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र नहीं:** लंबे समय से नवीन स्वयंसेवकों को न तो आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) दिए गए हैं और न ही विधिवत नियुक्ति पत्र, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

3. **सार्वजनिक आयोजनों से दूरी:** राष्ट्रीय पर्वों (स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस), त्योहारों, मेलों और वीआईपी कार्यक्रमों में सिविल डिफेन्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है, जबकि स्वयंसेवक ड्यूटी के लिए इच्छुक हैं।

4. **जानकारी का अभाव:** नए सदस्यों को यूनिफॉर्म, ड्रेस कोड, रैंक संरचना और उनके दायित्वों के संबंध में कोई समुचित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

**डीएम से हस्तक्षेप और सुधार की मांग**
भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील और विस्तृत जनपद होने के कारण सोनभद्र में समय-समय पर आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और प्राथमिक उपचार जैसी चुनौतियां आती रहती हैं। ऐसे में एक प्रशिक्षित संगठन प्रशासन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

समस्त वार्डन बंधुओं और स्वयंसेवकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि संगठन की समीक्षा कर नियमित मासिक बैठकें शुरू कराई जाएं, सभी को शीघ्र पहचान पत्र व नियुक्ति पत्र आवंटित किए जाएं, तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल का आयोजन कराया जाए ताकि इस मानव संसाधन का उपयोग जनहित में हो सके।

इस दौरान मुख्य रूप से जयशंकर राय (समस्त वार्डन बंधु), अनिल कुमार गुप्ता, मनोज कुमार पाठक, राजू अग्रहरि, अमान खान, प्रभुदेव पांडेय और रामचंद्र सहित भारी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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