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ग्राम पंचायत खवारानीजी द्वारा सिंचाई विभाग की सार्वजनिक नहर भूमि पर कथित अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण के विरोध में किसानों की आवाज-: कृष्ण कुमार शर्मा

ग्राम पंचायत खवारानीजी द्वारा सिंचाई विभाग की सार्वजनिक नहर भूमि पर कथित अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण के विरोध में किसानों की आवाज-कृष्ण कुमार शर्मा
खवारानीजी, जमवारामगढ़, दिनांक: ____
ग्राम पंचायत खवारानीजी क्षेत्र के किसानों में उस समय भारी रोष व्याप्त हो गया जब सिंचाई विभाग की सार्वजनिक नहर एवं उसकी पटरी की भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा कथित रूप से पक्का नाला निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की जानकारी सामने आई। क्षेत्र के वरिष्ठ किसान एवं समाजसेवी श्री रामजीलाल शर्मा ने इस मामले को किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
रामजीलाल शर्मा ने बताया कि संबंधित सार्वजनिक नहर वर्षों से क्षेत्र की कृषि व्यवस्था का मुख्य आधार रही है। इस नहर के माध्यम से आसपास के गांवों की हजारों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई होती है तथा सैकड़ों किसान प्रत्यक्ष रूप से इस जल स्रोत पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि नहर केवल जल आपूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। यदि नहर की भूमि अथवा उसकी संरचना से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जाती है तो इसका सीधा प्रभाव किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है।
रामजीलाल शर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा सिंचाई विभाग के अधीन आने वाली भूमि पर बिना आवश्यक विभागीय अनुमति, तकनीकी स्वीकृति एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के निर्माण कार्य करवाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि यह तथ्य सही हैं तो यह न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अवहेलना है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के अधीन आने वाली नहर, राजबाहा, माइनर तथा उनकी पटरी की भूमि आरक्षित सरकारी भूमि होती है। ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व संबंधित विभाग की लिखित अनुमति, तकनीकी परीक्षण, जल प्रवाह का अध्ययन तथा सक्षम अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया गया कोई भी निर्माण भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
रामजीलाल शर्मा ने बताया कि नहर की मूल संरचना प्रभावित होने से जल प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे नहर की वहन क्षमता कम होने की आशंका है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उन किसानों पर पड़ेगा जिनकी भूमि नहर के अंतिम छोर पर स्थित है। यदि पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचा तो किसानों की फसलें प्रभावित होंगी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि बरसात के मौसम में यदि जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होती है तो आसपास के खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ ग्रामीण मार्गों एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
रामजीलाल शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन विकास कार्य हमेशा कानून, नियमों एवं विभागीय स्वीकृतियों के अनुरूप होने चाहिए। किसी भी सार्वजनिक संसाधन, सिंचाई संरचना अथवा सरकारी भूमि को प्रभावित करके किया गया विकास कार्य जनहित के विपरीत सिद्ध हो सकता है।
क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता, उपखंड अधिकारी जमवारामगढ़, जिला कलेक्टर जयपुर एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करें। यदि निर्माण कार्य नियमों के विपरीत पाया जाता है तो उसे तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा निर्माण कार्य से संबंधित सभी स्वीकृतियों, तकनीकी अनुमोदनों एवं विभागीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए।
किसानों का कहना है कि सार्वजनिक नहर केवल सरकारी संपत्ति नहीं बल्कि हजारों किसानों की आजीविका का आधार है। इसके संरक्षण एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों की है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
रामजीलाल शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित एवं किसान हित को सर्वोपरि रखते हुए मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अवहेलना सामने आती है तो दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा नहर की मूल संरचना एवं सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित रखा जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो क्षेत्र के किसान लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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