21 साल तक नौकरी का इंतज़ार किया... और जब नौकरी मिली, तब रिटायर होने की उम्र भी निकल चुकी थी।
_केरल के अब्दुल मजीद ने 2005 में सरकारी शिक्षक बनने के लिए परीक्षा दी थी। परीक्षा पास की, मेरिट लिस्ट में नाम भी आया, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वक्त गुजरता गया, उम्मीदें टूटती गईं और जिंदगी आगे बढ़ती रही।_
_अब 2026 में अचानक उनके घर नियुक्ति पत्र पहुंचा। लेकिन तब तक उनकी उम्र 61 साल हो चुकी थी, जबकि सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है।_
_*सोचिए,* जिस नौकरी के लिए कोई अपनी जवानी के 21 साल इंतजार में गुजार दे, वही नौकरी उसे तब मिले जब वह उस पद पर काम करने के योग्य उम्र भी पार कर चुका हो।_
_यह खबर सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस सरकारी व्यवस्था पर सवाल है जहां एक फाइल की देरी किसी के पूरे जीवन का सपना छीन सकती है।_
_क्या अब्दुल मजीद के साथ न्याय हुआ? अपनी राय जरूर बताइए।_
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