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महाशक्ति जन कल्याण संगठन ने प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर संरक्षण मामले में प्रशासनिक रिपोर्टों को बताया सत्य की जीत

जमवारामगढ़, जयपुर। ग्राम पंचायत खवारानीजी स्थित प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर के संरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट कर दिया है। उपखंड अधिकारी जमवारामगढ़, विकास अधिकारी पंचायत समिति जमवारामगढ़ तथा ग्राम पंचायत खवारानीजी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ग्राम खवारानीजी में स्थित प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर पर भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा विधिवत जीर्णोद्धार एवं संरक्षण कार्य करवाया गया है तथा इस कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध निर्माण की पुष्टि नहीं हुई है।
महाशक्ति जन कल्याण संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि संगठन द्वारा प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ समय पूर्व समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों में यह आरोप लगाया गया था कि ग्राम खवारानीजी में स्थित प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य में अनियमितताएं हुई हैं तथा पुरातत्व विभाग द्वारा नियमों की अनदेखी की गई है। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे मामले की जांच करवाई।
जांच के दौरान ग्राम पंचायत खवारानीजी, पंचायत समिति जमवारामगढ़ तथा उपखंड प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड एवं राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि खसरा संख्या 704 में स्थित शिव मंदिर तथा खसरा संख्या 705 में स्थित प्राचीन बावड़ी पर भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य कराया गया है। कार्यकारी एजेंसी भी भारतीय पुरातत्व विभाग ही रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कार्य सरकारी संरक्षण योजना के अंतर्गत किया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा संख्या 704 गैर मुमकिन मंदिर के रूप में दर्ज है, जबकि खसरा संख्या 705 गैर मुमकिन बावड़ी के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। प्रशासनिक रिपोर्टों में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित भूमि खातेदारी श्रेणी की है तथा यदि किसी प्रकार के अधिग्रहण अथवा अन्य प्रशासनिक कार्यवाही की आवश्यकता होगी तो वह सक्षम विभाग द्वारा नियमानुसार की जाएगी।
महाशक्ति जन कल्याण संगठन का कहना है कि प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। वर्षों पुराने इन स्थलों का संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते इन धरोहरों का संरक्षण नहीं किया जाता तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता था। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए संरक्षण कार्य से इन ऐतिहासिक संरचनाओं को नया जीवन मिला है।
संगठन ने प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जांच रिपोर्टों के माध्यम से वास्तविक स्थिति जनता के सामने आई है। इससे भ्रम की स्थिति समाप्त हुई है तथा उन लोगों को भी जवाब मिला है जिन्होंने बिना तथ्यों के आरोप लगाए थे। संगठन ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद का विषय बनाने के बजाय इनके संरक्षण एवं संवर्धन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि महाशक्ति जन कल्याण संगठन भविष्य में भी क्षेत्र की प्राचीन बावड़ियों, मंदिरों, कुओं तथा अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से मांग की कि खवारानीजी क्षेत्र में स्थित सभी ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का सर्वे कराकर उन्हें संरक्षण की श्रेणी में शामिल किया जाए ताकि उनकी नियमित देखरेख सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक रिपोर्टों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्राचीन बावड़ी एवं शिव मंदिर के संरक्षण कार्य को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए गए। यह सत्य, पारदर्शिता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संगठन क्षेत्र की जनता से भी अपील करता है कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों का विरोध करें।

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