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गद्दों को बनाया जीवनरक्षक, पिता-पुत्र की बहादुरी ने बचाईं कई जानें

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल अग्निकांड में जहां कई लोगों की जान खतरे में पड़ गई, वहीं एक गद्दा व्यापारी और उसके बेटे ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से कई लोगों की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की।
होटल में आग लगने के बाद ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग मदद के लिए पुकार रहे थे। चारों ओर धुआं और लपटें फैल चुकी थीं। ऐसे में होटल के सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान ने बिना देर किए अपनी दुकान से गद्दे और रजाइयां निकालकर सड़क पर बिछा दीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ऊपर फंसे लोगों को नीचे कूदने के लिए कहा गया और नीचे बिछाए गए गद्दों ने कई लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया। कई लोगों ने इन्हीं गद्दों पर छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। इस दौरान पिता-पुत्र ने राहत और बचाव कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया कि इस प्रयास में उन्हें आर्थिक नुकसान जरूर हुआ, लेकिन इंसान की जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। उनका कहना है कि ऐसे समय में मानवता का धर्म निभाना सबसे बड़ा कर्तव्य है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर दोनों की जमकर सराहना हो रही है। लोग उन्हें इस हादसे का असली हीरो बता रहे हैं और प्रशासन से उन्हें सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि आपदा के समय साहस, संवेदनशीलता और मानवता ही सबसे बड़ी ताकत होती है। रियाजुद्दीन और अरमान का यह कदम उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सोच रखते हैं।
✍️ Rao Shokeen
Founder & Editor-in-Chief
Rao Digital India News

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